भैयाजी जोशी ने चिकित्सकों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़ा किया
संघ के सर कार्यवाह भैयाजी जोशी ने केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अश्विनी कुमार चौबे के सामने सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पर जमकर तंज कसा। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले चिकित्सकों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल खड़ा किया। कहा कि इनकी नए सिरे से समीक्षा करने की जरूरत है। वह कानपुर में शनिवार को बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कालेज में आयोजित आरोग्य भारती की राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि देश में तीन तरह की चिकित्सा सुविधा लोगों के लिए है। पहली सरकारी, दूसरी निजी और तीसरी धर्मार्थ चिकित्सालयों की सुविधा है। सर कार्यवाह ने कहा कि देश के सिर्फ 20 प्रतिशत लोगों को ही अच्छी चिकित्सा सुविधा मिल रही है। 80 प्रतिशत लोग धर्मार्थ या फिर सरकारी चिकित्सा व्यवस्था के भरोसे हैं। इसलिए जरूरी है कि इतने बड़े तबके को अच्छी चिकित्सा सुविधा मिले, सरकार को इस दिशा में सोचना होगा।
शासन स्तर पर भी इस दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोगों में अपने स्वास्थ्य को लेकर अज्ञानता ज्यादा है, इसे दूर करना भी जरूरी है। आने वाली पीढ़ियां अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहें इसके लिए प्राथमिक स्तर से ही पाठ्यक्रम में चिकित्सा और स्वास्थ्य का पाठ्यक्रम जोड़ना चाहिए। इस मौके पर मौजूद प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने भी इस विषय में कहा कि वह प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति की हैसियत से उच्च शिक्षा में स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरुकता संबंधी पाठ्यक्रम को लेकर चिंतन करेंगे। उन्होंने कहा कि लोगों की खान-पान की शैली व्यवस्थित हो, इसके लिए आरोग्य भारती पूरे देश में लोगों को जागरूक करने का कार्य कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार की तरफ से आयुष मंत्रालय शुरू करने को अच्छी पहल बताया। कहा कि शुद्घ पर्यावरण के लिए जन जागरण की आवश्यकता है।