रीढ़ पर ज्यादा दबाव बढ़ने से पैर की चप्पल तक छूटने लगी
मांसपेशियां कमजोर होने से हाथों की पकड़ ढीली हो जाती है। जिन रोगियों की रीढ़ पर ज्यादा दबाव बढ़ गया था, उनके पैरों पर भी असर आ गया। उनके पैरों की चप्पल छूट जाती थी और कदम सही नहीं पड़ते। तंत्रिकाओं में दिक्कत होने से फेफड़ों और डायाफ्राम पर भी असर आता है। इससे सांस लेने में परेशानी महसूस होती है। अगर रोग बहुत पुराना हो गया और उसने आदत में सुधार न किया तो फिर संवेदनशीलता पर प्रभाव आता है और पखाना, पेशाब आने पर पता नहीं चलता। उन्होंने बताया कि रोगियों में पुरुष और महिलाएं दोनों रहे हैं।
गलत पोस्चर की वजह से स्पाइनल कॉर्ड और मांसपेशियों में दिक्कत आ रही है। डिस्क के अलावा मांसपेशियों में इंजरी हो जाती है। स्पाइनल कॉर्ड से पूरे शरीर का तंत्रिका तंत्र जुड़ा होता है। इससे गर्दन से लेकर पैर के तलवे तक प्रभावित हो जाते हैं। अगर तुरंत इसमें एहतियात न बरतें, तो बड़ी समस्या पैदा हो जा रही है। -डॉ. चंद्रशेखर सिंह, नोडल अधिकारी पेन मेडिसिन विभाग
अध्ययन में शामिल थे 250 रोगी
- महिला रोगी 60 फीसदी, आयु वर्ग 18 से 35 वर्ष
- पुरुष रोगी 40 फीसदी, आयु वर्ग 30 से 50 वर्ष