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बेहमई में फूलन की बेरहमी: लाशों के ढेर में दबने से बची थी शफी मोहम्मद की जान, पुलिस की वर्दी पहनकर आए थे डकैत

Thu, 15 Feb 2024 02:55 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात

सार

14 फरवरी साल 1981 को बेहमई में फूलन देवी ने 20 ठाकुरों को गोली से छलनी कर दिया था। डाकुओं की रानी कही जाने वाले फूलन देवी के नरसंहार की घटना को सुन आज भी लोगों की रूह कांप उठती है। 
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जानकारी देते शफी मोहम्मद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर देहात के बेहमई गांव में शफी मोहम्मद अपने उस्ताद नजीर खां के साथ कच्चे मकान की छत डाल रहे थे तभी यमुना नदी से सटे ऊंचे टीले से शोर सुनाई दिया। जब तक कुछ समझ पाते पुलिस की वर्दी में डकैतों ने चारों तरफ से पूरा गांव घेर लिया। डकैतों ने नजीर खां को गोली मारकर हत्या कर दी तो शफी ने लाशों के बीच छिपकर जान बचाई थी।
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बेहमई नरसंहार कांड के चश्मदीद सिकंदरा के अशोक नगर निवासी शफी मोहम्मद बताते हैं कि घटना वाले दिन वह अपने उस्ताद राजमिस्त्री नजीर खां के साथ बेहमई गांव में तुलसीराम के घर कच्चे घर पर छत बनाने का काम कर रहे थे। उस समय उनकी उम्र 10 वर्ष के करीब थी। बताया कि जिस समय काम कर रहे थे उसी समय डकैत फूलन देवी के गिरोह ने यमुना नदी के रास्ते आकर गांव को घेर लिया। गांव के लोगों के साथ नजीर खां पर भी गोलियां बरसाईं तो वह लाशों के ढेर में छिप गए। जब डकैत चले गए तो वह बाहर निकले और खेतों के रास्ते चीखते चिल्लाते साइकिल से सिकंदरा की ओर भागे थे। शफी मोहम्मद बताते हैं कि गोलियों की गूंज आज भी कानों में गूजंती है। बुधवार को कोर्ट का फैसला आने पर जहां शफी मोहम्मद ने खुशी जाहिर की। वहीं, अपने उस्ताद नजीर खां को याद कर उनकी आंखें नम हो गईं।

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पुलिस की वर्दी पहनकर आए थे डकैत
बेहमई गांव जाने में डकैतों को डर था कि कोई उन्हें पहचान न लें। इस वजह से वह पुलिस की वर्दी पहनकर गांव पहुंचे थे। जब वह गांव पहुंचे तो गांव ने उन्हें पहचान लिया था।

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बेहमई कांड का घटनाक्रम एक नजर में
- बेहमई कांड का घटनाक्रम एक नजर में14 फरवरी 1981 को नरसंहार
- 07 अप्रैल 1981 को पहली चार्जशीट
- 31 अक्तूबर को आठवीं चार्जशीट
- वर्ष 1994 में फूलनदेवी पेरोल पर रिहा
- 25 जुलाई 2001 को फूलन की हत्या
- वर्ष 2012 में सुनवाई के लिए मामला डीजीसी राजू पोरवाल को मिला
- वर्ष 2012 में ही पांच आरोपियों पर आरोप तय हुए
- वर्ष 2014 में गवाहों की गवाही पूरी हुई 
- 14 फरवरी 2024 को फैसला आया
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इनकी हुई थी हत्या

बेहमई नरसंहार कांड में तुलसीराम, राजेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, जगन्नाथ सिंह, वीरेंद्र सिंह, रामाधार सिंह, शिवराम सिंह, रामचंद्र सिंह, शिवबालक, बनवारी सिंह पुत्र महाराज सिंह, लाल सिंह, नरेश सिंह, दशरथ सिंह, वनवारी सिंह पुत्र लाखन सिंह, हिम्मत सिंह, हुकुम सिंह, हरिओम सिंह, राम अवतार सिंह निवासी बेहमई, तुलसीराम निवासी राजपुर तथा नजीर खां निवासी सिकंदरा की बर्बरतापूर्वक हत्या कर दी गई थी।

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