कानपुर देहात/राजपुर। भोगनीपुर वन रेंज के जल्लापुर में वन कर्मियों ने सोमवार रात पिंजड़ा रखवा दिया। इससे पहले तेंदुआ ने हमला कर एक घोड़ा मार डाला। घोड़े का पालक उसे खेत में छोड़कर नजदीक नलकूप पर पानी पीने गया था। डीएफओ ने कानपुर प्राणि उद्यान प्रशासन को तेंदुए को ट्रैस कर ट्रैंकुलाइजर के जरिये पकड़ने के लिए पत्र लिखा है। मंगलवार को तेंदुआ दिबैर की मड़ैया के पास गुबार में देखा गया है।
दिबैर की मड़ैया में पहली बार 2 फरवरी की रात तेंदुआ देखा गया था। वन कर्मियों की टीम पहुंची लेकिन तेंदुआ उन्हें नहीं दिखा। इस पर वन अफसरों ने तेंदुआ के जंगल की ओर निकल जाने की बात कही थी। वन अफसरों के अनुमान के विपरीत लगातार नौ दिन से तेंदुआ 10 किमी के दायरे में मौजूद है। संवाद न्यूज एजेंसी ने तेंदुआ पकड़ने के लिए किए गए इंतजार पर सवाल उठाया तब जल्लापुर में पिंजड़ा रखवा दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि दिबैर की मड़ैया से गुबार और फिर जल्लापुर में तेंदुआ दिख चुका है। सोमवार शाम को गुबार निवासी धनीराम पालतू घोड़ा लेकर खोजारामपुर गांव में राजन सिंह के यहां जा रहे थे। धनीराम ने बताया कि प्यास लगने पर घोड़ा अरहर के खेत के पास छोड़कर वह नजदीक स्थित नलकूप पर पानी पीने चले गए। वहां से वापस लौटे तो घोड़ा मृत मिला। घोड़े के जबड़े व पेट के पास का मांस गायब था। उनका कहना है कि तेंदुएं ने हमला कर घोड़े को मार डाला। इस घटना के बाद दिबैर की मडै़या, जल्लापुर व गुबार आदि गांवों के लोग डरे हैं।
किसान खेत जाने से डर रहे हैं और टोली बनाकर हाथ में लाठी-डंडे लेकर ही आवाजाही कर रहे हैं। वन रेंजर स्वामी दीन ने बताया कि जल्लापुर में पिंजड़ा रखवा दिया गया है। तेंदुआ के जालौन सीमा से जिले में दाखिल होने का इनपुट मिला है। जालौन क्षेत्र में यह करीब एक माह रुका रहा इसके बाद नदी के रास्ते यहां पहुंचा है। लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। राजपुर पशुचिकित्सालय के पशु चिकित्सक डॉ. गौरव सक्सेना ने बताया कि किसी जानवर के हमले के निशान घोड़े के जबड़े व पेट पर मिले हैं। पोस्टमार्टम के बाद ही मौत ही वजह साफ हो पाएगी।
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तेंदुआ को सुरक्षित पकड़ने के लिए जल्लापुर में पिंजड़ा रखवाया गया है। वहीं कानपुर प्राणि उद्यान प्रशासन को भी तेंदुआ को ट्रैस करने और ट्रैंकुलाइजर के जरिये पकड़ने के लिए पत्र लिखा गया है। दिबैर की मड़ैया व आसपास के गांवों में लोगों को सतर्क किया गया है। मृत घोड़ा का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। - एके पांडेय, डीएफओ।
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जानें तेंदुआ की आदत
पर्यावरण मित्र व वन्य जीवों के जानकार नवीन दीक्षित ने बताया कि तेंदुआ बहुत शक्तिशाली और चतुर वन्यजीव है। इनकी एकाग्रता बेमिसाल होती है। शिकार को पकड़ने की तकनीक और हमला की शैली इसे अव्वल शिकारी बनाती है। आमतौर पर ये रात में ही निकलते हैं। प्रति घंटे 60 किमी गति से दौड़ सकते हैं। तेंदुआ इंसानों पर अक्सर रात में हमला करता है। जानकारों का कहना है कि कई मामले देखे गए हैं जब तेंदुआ रात में घरों में घुस जाते हैं और सो रहे लोगों पर हमला कर देते हैं।