कानपुर। सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट की ओर से नामित न होने पर कोई भी अधिवक्ता खुद को सीनियर एडवोकेट नहीं लिख सकता। इस संबंध में एक अधिवक्ता द्वारा दूसरे के खिलाफ की गई शिकायत पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अनुशासन समिति ने विपक्षी अधिवक्ता को सख्त चेतावनी दी है।
अशोकनगर निवासी अधिवक्ता अरुण आहूजा ने सर्वोदयनगर निवासी अधिवक्ता अजय टंडन के खिलाफ यूपी बार काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अनुशासन समिति को स्थानांतरित कर दी गई। शिकायत में कहा गया था कि अजय टंडन अपने नाम के साथ सीनियर एडवोकेट लिखते हैं जबकि वह किसी भी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के नामित सीनियर एडवोकेट नहीं हैं।
आरोप लगाया कि अजय विभिन्न संगठनों से जुड़े होने का दावा भी करते हैं। व्यावसायिक गतिविधियों का विज्ञापन करते हैं। इस संबंध में कई सबूत भी पेश किए गए। समिति के कहने पर अजय की ओर से एक अंडरटेकिंग (वचन पत्र) देकर कहा गया कि भविष्य में वह नाम के साथ सीनियर एडवोकेट नहीं लिखेंगे। हालांकि, अनुशासन समिति वचनपत्र की भाषा से संतुष्ट नहीं हुई। समिति ने अधिवक्ता की उम्र को ध्यान में रखते हुए उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया।