पुखरायां। गुरुपूर्णिमा का पर्व शनिवार को जिले में धूमधाम से मनाया गया। भक्तों ने मंदिरों में हवन पूजन कर भंडारा आयोजित किया गया। यमुना व सेंगुर नदी के घाटों में स्नान कर संतों और गुरुओं की आरती कर दक्षिणा दी। कोविड के कारण लोगों को एक स्थान पर एकत्रित नहीं होने दिया गया।
अषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा पर्व के रूप में मनाया जाता है। जिसके लिए शनिवार की सुबह से भक्तों ने स्नान कर मंदिरों में पूजन अर्चन कराना शुरू कर दिया। यमुना नदी के मूसानगर घाट पर, दुर्वाषा आश्रम के पास सेंगुर नदी के घाट पर भक्तों ने स्नान किया। भगवान शिव की आराधना कर संतों के आश्रम में पहुंच कर आशीर्वाद लिया। पुखरायां के बड़े महादेवन मंदिर में भक्तों ने पूजन अर्चन की।
संत श्री दिगंबर सौनक गिरि बाबा की आरती कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद हरी गुप्ता, किसन गुप्ता, दिनेश गुप्ता, जगमोहन गिरि, प्रमोद त्रिपाठी, अमरीश अग्निहोत्री, लल्ला तिवारी, विकास गौड़, मुन्ना कश्यप, रुचि गौड़ ने भंडारे में प्रसाद वितरण कराया। आचार्य विनोद मिश्र, अखिलेश शुक्ल ने कहा कि गुरु की महिमा वेदों में वर्णित है। गुरु शिष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
दुर्वाषा आश्रम में विधायक विनोद कटियार ने पहुंच कर महंत कैलाश पुरी को माला पहनाकर दक्षिणा दी। यहां जीतेंद्र सचान, राजेश अवस्थी, दीपक सेन, सुमित कटियार मौजूद रहे। वहीं गौर श्री कृष्ण धाम में गुरु पूर्णिमा पर मंत्रोच्चारण कर आचार्यों ने हवन में आहूतियां दिलाई। पुजारी सुधीर कुमार शुक्ल ने भोग लगाया। योगेंद्र उर्फ रामू द्विवेदी, श्रीप्रकाश द्विवेदी, दिनेश तिवारी सहित लोगों ने प्रसाद वितरण कराया।
साध्वी निरंजन ज्योति ने गुरुदेव की प्रतिमा का किया पूजन
मूसानगर। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अच्युत ब्रह्मधाम अखंड परमधाम स्थित केंद्रीय राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के आवास में हवन पूजन कर भंडारा आयोजित किया गया। इसके बाद प्रवचन हुआ। राज्य मंत्री महामंडलेश्वर साध्वी निरंजन ज्योति ने अपने गुरु महाराज अच्युतानंद शास्त्री की प्रतिमा का पूजन किया। इसके बाद हवन और भंडारे का आयोजन हुआ। कस्बा समेत गांवों से पहुंचे भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
साध्वी निरंजन ज्योति ने गुरु की महत्ता के बारे में बताया। उन्होंने कहा किसी भी प्राणी की सबसे पहले गुरु उसकी मां होती है। हमारी संस्कृति में मां को गुरु का स्थान दिया गया है। उसके बाद लोग गुरु की शरण में जाते हैं। जहां उन्हें अच्छे बुरे का बोध कराया जाता है। वहीं उत्तरवाहिनी यमुना तट पर स्थित हनुमान मंदिर में भी भक्तों का ताता लगा रहा। महंत बद्री दास महाराज ने हवन कर भंडारा आयोजित किया। (संवाद)
घर-घर में हुआ पूजन, किया बेड़ही का भोजन
पुखरायां। अषाढ़ माह की पूर्णिमा का पर्व कुछ खास तरीके से भी मनाया जाता है। शनिवार को घर-घर महिलाओं ने परंपरागत ढंग से पूजा अर्चना किया। महिलाओं ने ब्रह्म मुहूर्त में मौन धारण कर स्नान किया। इसके बाद शीरा और दाल भरकर बेड़ही बनाई गई। जिनका पूजन कर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया गया। मान्यता है कि इस तरह का पूजन करने से खेती में अच्छी फसल पैदावार होती है। वहीं बेड़ही का भोजन करने से पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है।