कारपोरेट सेक्टर की तरह सरकारी बैंक भी अपने टैलेंटेड और युवा कर्मचारियों व अफसरों को अपने नेट प्रॉफिट में तीन से पांच फीसदी के इंसेंटिव और अन्य सुविधाएं देने का मन बना रहे हैं।
स्टाफ को अपने से जोड़े रखने और बेहतर रिजल्ट पाने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने ऐसा प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा है। सरकार ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) और बैंक इंडस्ट्री से जुड़ी अन्य संस्थाओं से उनकी राय मांगी है।
डीजीएम एंड कारपोरेट डेवलपमेंट (एसबीआई) अश्वनी मेहरा की ओर से दो सितंबर को वित्त मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि सरकारी बैंकों में नौकरी के प्रति युवाओं का रुझान ज्यादा नहीं है। इस कारण बैंकों में टैलेंटेड युवाओं की कमी है।
इसको देखते हुए बैंकों के नेट प्रॉफिट पर हिस्सा देने की पेशकश की गई है। यह हिस्सा टैलेंटेड युवाओं को इंसेंटिव के रूप में दिया जाएगा। यह संबंधित कर्मचारी या अफसर की योग्यता और उसके काम पर निर्भर करेगा। नेशनल कंफेडरेशन ऑफ बैंक इंप्लाइज उप्र के सहायक महामंत्री राजेंद्र अवस्थी ने बताया कि निजी बैंकों की तुलना में राष्ट्रीयकृत बैंकों में मिलने वाली सैलरी, सुविधाएं बेहतर न होने से राष्ट्रीयकृत बैंकों में युवा आना नहीं चाहता है।
जो आते भी हैं, उनमें ज्यादातर नौकरी छोड़कर चले जाते हैं। अकेले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में तीन वर्ष के दौरान नियुक्त होने वाले करीब 30 फीसदी युवाओं ने कुछ समय नौकरी करने के बाद निजी बैंकों या फारेन बैंकों में नौकरी कर ली क्योंकि ये बैंकें न केवल आकर्षक वेतन देती हैं बल्कि समय-समय पर कई तरह के इंसेंटिव भी देती हैं।