इलाहाबाद बैंक के बाद अब बैंक ऑफ इंडिया ने कानपुर के उद्योगपति विक्रम कोठारी को विलफुल डिफॉल्टर (जानबूझकर ऋण न चुकाने वाला) घोषित किया है। कोठारी ने अपनी चार कंपनियों के नाम से बैंक ऑफ इंडिया से 2468 करोड़ का लोन लिया था। वर्तमान में 1359 करोड़ रुपये बकाया है। बंधक संपत्तियों को कब्जे में लेने के बाद यह रकम शेष बची है। विलफुल डिफॉल्टर की श्रेणी में विक्रम कोठारी के बेटे राहुल कोठारी व पत्नी साधना कोठारी को शामिल किया है।
बैंक ऑफ इंडिया ने समाचार पत्रों में उनके फोटो प्रकाशित कर लोगों को आगाह किया है कि उनके साथ होने वाले किसी भी लेनदेन में सावधानी बरतें। इसकी सूचना रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी दी है। तिलक नगर निवासी विक्रम कोठारी ने अपनी कंपनी मैसर्स कोठारी फूड एंड फ्रेगरेंस प्रा.लि. के नाम से 15 जनवरी 2014 को बैंक ऑफ इंडिया की कस्तूरबा मार्ग शाखा से लेटर ऑफ क्रेडिट के जरिये 300 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। इस कंपनी का रजिस्टर्ड ऑफिस 63/2 सिटी सेंटर माल रोड दर्शाया।
इसमें खुद विक्रम कोठारी, पत्नी साधना कोठारी, बेटा राहुल कोठारी और बहू अर्चना कोठारी कंपनी के निदेशक हैं। लोन के गारंटर के तौर पर भी इन चारों का नाम हैं। कंपनी की ओर से यह लोन समय पर जमा नहीं किया गया। 20 मई 2019 तक इस कंपनी पर 154 करोड़ 25 लाख मूलधन और वर्ष 2015 से 18.25 फीसदी की दर से ब्याज और अन्य खर्चे बकाया हैं।