सिर से मां का साया उठने के बाद पिता ने भी मुंह मोड़ लिया। बड़ी बहन के साथ जीवन काट रही किशोरी को मां समान मामी ने एक खूबसूरत जिंदगी के हसीन सपने दिखाए। धीरे-धीरे युवावस्था की ओर बढ़ रही किशोरी दिल में कई अरमान समेटे अपनी मामी के भरोसे पर बांग्लादेश छोड़ भारत के लिए निकल पड़ी।
दो देशों के बीच की दूरी, आने-जाने के नियम-कानून और दुनियादारी से अनजान किशोरी मामी के बहकावे में आकर उस गैंग के सदस्यों के बीच फंस गई जो किशोरियों की खरीद-फरोख्त के काले धंधे में लिप्त हैं।
अपने गांव से ढाका, ढाका से कोलकाता और कोलकाता से कानपुर तक का सफर तय करने में उसे आठ दिन लगे। मामी द्वारा भेजे गए लोगों के साथ सियालदाह में एक होटल में रुकने के दौरान बातचीत से उसे इन लोगों के गलत इरादे का अंदेशा हो गया।
फिर भी वह अपने शक को पुख्ता करने के लिए उन लोगों के साथ ट्रेन में सवार हो गई। ट्रेन में मामी और उन लोगों के बीच वीडियो कॉल पर हुई बातचीत से उसे खुद के अपराधियों के बीच फंस जाने की बात समझ आ गई। इसके बाद भी उसने हौसला नहीं छोड़ा।