दहेज हत्या के एक चर्चित मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश डकैती छोटेलाल यादव की अदालत ने शनिवार को अहम फैसला सुनाते हुए दोषी पति जमील खां को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अन्य धाराओं में भी सजा के साथ करीब साढ़े चार हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अर्थदंड न चुकाने पर दोषी को दो माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। बताया गया कि आरोपी घटना के समय से ही जेल में बंद है। इसी मामले में सह-आरोपी ससुर सहादत खां की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई, जबकि सास जोहरा खातून को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
बदौसा थाना क्षेत्र के बगीचापुरवा निवासी शरीफ खां ने 18 सितंबर 2020 को थाना नरैनी में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने बताया था कि उनकी बहन सहरोजा की शादी वर्ष 2018 में नरैनी थाना क्षेत्र के कल्हरा गांव निवासी जमील खां के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही पति, सास और ससुर द्वारा बाइक और एक लाख रुपये की अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था। मांग पूरी न होने पर सहरोजा को मारपीट कर कमरे में बंद कर दिया जाता था और खाना भी नहीं दिया जाता था। पीड़िता ने अपने भाई को आशंका जताई थी कि यदि जल्द मदद नहीं मिली तो उसकी हत्या हो सकती है।
17 सितंबर 2020 को ससुराल पक्ष से फोन कर उसकी मौत की सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे भाई ने हत्या का आरोप लगाते हुए कई लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के दौरान पुलिस ने कुछ आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में अलग कर दिया और पति, सास व ससुर के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने 58 पृष्ठीय फैसले में पति जमील खां को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई, जबकि सास को बरी कर दिया।