दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता सपना की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश चंद्रपाल द्वितीय की अदालत ने उसके पति मुन्ना और सास मंटोलिया को सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर तीन-तीन हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसे जमा न करने पर उन्हें छह-छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
सपना के पिता मिही लाल ने बताया कि 17 मई 1995 को विवाह के बाद ससुराल वालों ने मोटरसाइकिल और 20 हजार रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग की थी। मांग पूरी न होने पर 7 जून 1996 को आरोपियों ने सपना को जहर देकर मार डाला और शव को फंदे पर लटका दिया, जबकि वह दो माह से गर्भवती थी। हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए शव को जला दिया गया। पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज न करने पर मिही लाल ने अदालत की शरण ली, जिसके बाद 30 जुलाई 1996 को इस मुकदमे की कार्यवाही प्रारंभ हुई। न्यायाधीश ने पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों के आधार पर पति और सास को दोषी करार देते हुए यह फैसला सुनाया।