मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने में करीब नौ माह की देरी को स्थायी लोक अदालत ने सेवा में कमी माना है। अदालत ने नगर पालिका परिषद बांदा के अधिशासी अधिकारी को मामले में जिम्मेदार कर्मचारी को चिह्नित कर विभागीय व विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
शहर के मोहल्ला कैलाशपुरी निवासी गिरजेश कुमार पांडेय ने अपनी मां रामरती देवी पांडेय के मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए 21 अगस्त 2025 को नगर पालिका में आवेदन किया था। आवेदन के साथ शपथ पत्र, गवाहों के शपथ पत्र, आधार कार्ड और 10 रुपये का विलंब शुल्क भी जमा किया गया था। इसके बावजूद प्रमाण-पत्र जारी नहीं हुआ। पटल लिपिक संजीव कुमार पर अनैतिक धन की मांग करने का आरोप लगाते हुए गिरजेश ने 29 अक्तूबर 2025 को स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया। नगर पालिका ने पहले शपथ पत्रों में ओवरराइटिंग होने की बात कही थी। बाद में 16 मई 2026 को दी गई आख्या में सभी प्रपत्र सही पाए गए और मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने की संस्तुति की गई।
स्थायी लोक अदालत ने प्रकरण में देरी को सेवा में कमी माना। स्थायी आलेक अदालत के अध्यक्ष विवेक कुमार गुप्ता, वरिष्ठ सदस्य डॉ. बृम्हदत्त सिंह व सदस्य शिवांगी शुक्ला ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को जिम्मेदार कर्मचारी की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। वादी की मुख्य मांग प्रमाण-पत्र जारी करने की थी, जो वाद के दौरान पूरी हो गई थी।