भूरागढ़ दुर्गा के नीचे स्थित नटबली मंदिर
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मकर संक्रांति के अवसर पर शहर के ऐतिहासिक भूरागढ़ दुर्ग में दो दिवसीय मेले का भव्य आयोजन किया गया। जिसने हजारों श्रद्धालुओं और आगंतुकों को आकर्षित किया। यह मेला न केवल धार्मिक महत्व का प्रतीक रहा, बल्कि प्रेम, शौर्य और परंपराओं का संगम भी बना। केन नदी में स्नान, नौका विहार, विराट दंगल और नटबली की समाधि पर प्रेमियों के मत्था टेकने जैसे विभिन्न आकर्षणों ने मेले को खास बनाया।
मेले का एक प्रमुख आकर्षण नटबली की समाधि रही। जहां प्रेमी जोड़ों ने आकर मत्था टेका और अपनी मन्नतें मांगी। यह समाधि लगभग 600 वर्ष पूर्व ग्राम भूरागढ़ के नट, भूरा, और भूरागढ़ राजघराने की एक राजकुमारी के बीच पनपी एक अनूठी प्रेम कहानी की गवाह है। कहा जाता है कि राजघराने के विरोध के कारण प्रेमी को मार दिया गया, जिससे आहत होकर प्रेमिका ने भी अपनी जान दे दी। उनकी याद में बना यह छोटा सा मंदिर हर साल मकर संक्रांति पर प्रेमियों के लिए आस्था का केंद्र बन जाता है। इसके अलावा ऐतिहासिक भूरागढ़ दुर्ग में स्थित शहीद स्मारक पर सेवानिवृत्त सैनिकों और समाजसेवियों ने जंगे-आज़ादी के शहीदों और भारतीय सेना के वीर जवानों को नमन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्थान 300 स्वतंत्रता सेनानियों की शहादत का गवाह है, जो देश के प्रति उनके सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है।