सरकार अपराधियों पर नकेल कसने के लिए अस्पताल, थाना, बाजार समेत सभी सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाने पर जोर दे रही है। वहीं, कानपुर देहात में सार्वजनिक स्थलों को तो छोड़िए, रनियां थाने में ही सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। जिला अस्पताल में लगे 10 कैमरे 20 दिन से खराब पड़े हैं।
इसके चलते रनियां थाने में हुई व्यापारी बलवंत सिंह की पिटाई और जिला अस्पताल में उसे भर्ती कर मृत घोषित किए जाने संबंधी डिजिटल साक्ष्य पुलिस और एसआईटी को नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में एसआईटी को हत्यारोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाने में परेशानी हो रही है। जिला अस्पताल में आपराधिक घटनाओं व तीमारदारों के हंगामे के मद्देनजर चप्पे-चप्पे में निगरानी के लिए तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
अस्पताल की इमरजेंसी से वार्डों तक 10 कैमरे लगे हैं, लेकिन अधिकांश समय यह खराब रहते हैं। इसका खुलासा व्यापारी बलवंत सिंह हत्याकांड से हुआ। पुलिस और एसआईटी जिला अस्पताल की इमरजेंसी में 12 दिसंबर की रात बलवंत को भर्ती कर इलाज करने व मृत घोषित करने संबंधी डिटिजल साक्ष्य लेने पहुंची, तो पता चला कि इमरजेंसी के कैमरे बंद थे।
हालांकि एसआईटी अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर जांच के लिए ले गई है। सूत्रों की मानें तो अस्पताल में लगे सभी 10 कैमरे 20 दिनों से खराब हैं। इस कारण रनियां थाने से बलवंत को जीवित अवस्था में लाया गया या मृत यह कैद नहीं हो पाया। इतना ही नहीं जब एसआईटी रनियां थाने में बलवंत हत्याकांड से जुड़े साक्ष्य एकत्रित करने पहुंची, तो पता चला कि रनियां चौकी को हाल में ही थाने का दर्जा दिया है, लेकिन यहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं।
करीब 20 दिन से अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद हैं। इसे ठीक करने के लिए इंजीनियर को बुलाया गया है। - डॉ. मनोज निगम, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल