दिल का ब्लॉकेज गुब्बारा खोल रहा है। अब स्टंट की जरूरत नहीं है। कानपुर में डैब विधि से कार्डियोलॉजी में छह महीने में 150 मरीजों का ब्लॉकेज खोला गया है। गुब्बारे के माध्यम से दवा लगा दी जाती है। कोलेस्ट्रॉल का जमाव दोबारा नहीं होता।
दिल की धमनियों और नसों के ब्लॉकेज के रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में ड्रग एल्यूटिंग बैलून (डैब) विधि से गुब्बारा डालकर ब्लॉकेज खोल दिया जा रहा है। ब्लॉकेज के स्थान पर धातु का स्टंट लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। गुब्बारे के जरिये दवा लगा देने से उस स्थान पर दोबारा ब्लॉकेज भी नहीं होता है।
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कार्डियोलॉजी में डैब विधि से छह महीने में डेढ़ सौ रोगियों का इलाज हो चुका है। आयुष्मान, असाध्य रोग योजना और पंडित दीन दयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना के लाभार्थियों को इंस्टीट्यूट में निशुल्क इलाज मिलता है।
दिल की धमनियों और नसों के ब्लॉकेज के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बहुत से रोगी धातु का स्टंट लगवाना पसंद नहीं करते। धातु के स्टंट के ऊपर दवा लगी रहती है। यह दवा दो-तीन साल में छूट जाती है और सिर्फ धातु बची रहती है। डैब विधि में धमनी की सतह पर दवा लगा दी जाती है, जिससे दोबारा ब्लॉकेज नहीं होता।
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इंस्टीट्यूट के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि जिस स्थान पर ब्लॉकेज होता है, वहां नस के जरिये गुब्बारा पहुंचाया जाता है। इसके बाद एक मिनट तक फुलाए रखा जाता है। इससे ब्लॉकेज खुल जाता है। गुब्बारे के ऊपर दवा लगा होती है।
जब गुब्बारा फुलाया जाता है तो इसकी सतह पर लगे नैनो कण धमनी या नस की सतह पर चिपक जाते हैं। दवा उस स्थान पर चिपकी रहती है। दवा आर्टरी को स्टेब्लाइज कर देती है। इससे दोबारा ब्लॉकेज नहीं होता। दिल के अलावा पैरों की नसों के ब्लॉकेज को खोलने के लिए भी इसी विधि का इस्तेमाल करते हैं।
न स्टंट डालने का झंझट न दोबारा ब्लॉकेज की समस्या
डैब विधि में आसानी और फायदा यह है कि इसमें स्टंट डालने की परेशानी नहीं होती। जिन रोगियों की आर्टरी टेढ़ी-मेढ़ी होती है या आर्टरी में कैल्शियम का जमाव अधिक होता है, उसमें स्टंट आसानी से नहीं जा पाता। इससे दिक्कत आती है। डैब में गुब्बारा वहां आसानी से चला जाता है।
इसके अलावा धातु के स्टंट के ऊपर लगी दवा जब छूट जाती है तो दोबारा ब्लॉकेज होने का खतरा रहता है। इसके अलावा एक बार स्टंट डाल दिया गया तो जिंदगीभर रोगी की धमनी में पड़ा रहता है। डैब में ब्लॉकेज खोलकर दवा लगाकर गुब्बारे को बाहर निकाल लिया जाता है।