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राम की राजनीति के प्रेरणास्रोत रहे बजरंग

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कानपुर देहात। पैतृक गांव पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उनकी राजनीति के प्रेरणास्रोत रहे स्व. बजरंग सिंह का नाम लेना नहीं भूले। उन्होंने 70 साल पहले बजरंग सिंह की ओर से डॉ. राममनोहर लोहिया को परौंख लाने की यादें ताजा की। उस दौर के बाद से ही कोविंद के मन में राजनीति में उतरने की अलख जगती रही। साल 1991 में उन्होंने घाटमपुर लोकसभा से चुनाव लड़कर इसे सही साबित करके दिखाया। राष्ट्रपति ने स्व. बजरंग सिंह के छोटे भाई व सहपाठी जसवंत सिंह का भी जिक्र किया।
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परौंख में संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने करीबियों के नाम गिनाएं। उन्होंने अपनी राजनीति के प्रेरणास्रोत रहे स्व. बजरंग सिंह का नाम खास तौर पर लिया। राष्ट्रपति ने कहा कि स्व. बजरंग सिंह परौंख गांव में राजनीति के जन्मदाता रहे हैं। जसवंत सिंह ने बताया कि वर्ष 1951 में उनके भाई सोशलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष डॉ. लोहिया को गांव लाए थे।
तब वह और राष्ट्रपति गांव की पाठशाला में कक्षा तीन में एक साथ पढ़ते थे। डॉ. लोहिया ने गांव की रहनिया चौक पर जनसभा की थी। यहां का रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भ्रमण किया है। जनसभा में कई गांवों के लोग बड़ी संख्या में आए थे।
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राष्ट्रपति ने शिक्षा देने वाले गुरु समेत 16 करीबियों का लिया नाम
राष्ट्रपति ने परौंख में मंच पर संबोधन के दौरान 16 करीबियों के नाम गिनाए। करीबी रहे ठाकुर जसवंत सिंह, विजय पाल सिंह, राजकिशोर, महेश सिंह, भोले सिंह, स्व. हरीराम, स्व. चंद्रभान, स्व. राजाराम, स्व. दशरथ सिंह, स्व. रामचंद्र शुक्ला, स्व. कैलाश नाथ, स्व. तोराब, स्व. शोराब, नोनारी शाही परिवार के स्व. बना साहब, स्व. बजरंग सिंह व प्राथमिक शिक्षा देने वाले नोनारी के शिक्षक स्व. शंभूदयाल त्रिपाठी का नाम गिनाया।
देश के पहले नागरिक से मिलकर खुश हुए
परौंख के बलवान सिंह कहते हैं कि चाचा रामनाथ कोविंद के गांव आने पर बेहद खुशी है। अब उन्होंने राष्ट्रपति भवन बुलाया है। परौंख के राजकिशोर ने बताया कि राष्ट्रपति का गांव आना अविस्मरणीय पल है। उनसे मिलकर बेहद खुशी हुई। भोले सिंह कहते हैं कि हमेशा से राष्ट्रपति के गांव आने की चाहत थी। काफी दिनों से आने की बात कह रहे थे। गांव आने पर खुशी मिली है।
परौंख की राम सिया ने बताया कि लोहिया के संघर्ष को पति रामचंद्र शुक्ल ने बनाए रखा। अब पति नहीं हैं लेकिन राष्ट्रपति ने मंच से उनका नाम लिया, तो अच्छा लगा। परौंख की शांति देवी कहती हैं कि राष्ट्रपति उनके पति के मित्र रहे हैं। पति अब नहीं हैं। राष्ट्रपति ने गांव का नाम रोशन किया है। गांव में विकास भी हुआ है। परौंख के अभिषेक सिंह कहते हैं कि राष्ट्रपति के आने से वह बेहद प्रसन्न हैं। उनका गांव के प्रति लगाव देखकर बहुत अच्छा लगा।
सहपाठी से मिलकर गांव के लिए मांगी बरातशाला
परौंख के विजय पाल सिंह ने राष्ट्रपति के साथ प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की थी। रविवार को बाल सखा से मिले। इस दौरान दोनों के चेहरों पर खुशी तैर गई। राष्ट्रपति से मिलकर विजय पाल सिंह ने गांव के लिए बरातशाला की मांग की। उन्होंने कहा कि अपने पिता और मां के नाम से यहां बरातशाला बनवाएं। इस पर राष्ट्रपति मुस्कुरा दिए। विजय पाल सिंह ने बताया कि छह साल पूर्व राष्ट्रपति गांव आए थे, तब बिहार के राज्यपाल थे। उन्होंने कहा कि हमेशा उनसे अपनत्व रहा। जब मिले, गले लगाकर मिले। इस बार राष्ट्रपति का प्रोटाकॉल आड़े आ गया।
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