हनीट्रैप में फंसे ब्रह्मोस यूनिट के सिस्टम इंजीनियर निशांत अग्रवाल की जमानत अर्जी मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने बुधवार को खारिज कर दी। यूपी एटीएस ने निशांत के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य कोर्ट में पेश किए। इसी आधार पर जमानत खारिज हुई। निशांत पर रक्षा विभाग की गोपनीय सूचनाएं और इससे जुड़े दस्तावेज पाकिस्तान को लीक करने का आरोप है।
यूपी एटीएस को 2018 में इनपुट मिला था कि कानपुर के दो वैज्ञानिक (एक महिला भी) समेत ब्रह्मोस के सिस्टम इंजीनियर निशांत अग्रवाल हनीट्रैप में फंसे हैं। निशांत रुड़की का रहने वाला है। मामले की जांच एटीएस कानपुर यूनिट को सौंपी गई।
जांच के दौरान निशांत के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य मिले, जिसके बाद 8 अक्तूबर 2018 को एटीएस कानपुर यूनिट ने उसे नागपुर से गिरफ्तार कर लिया था। तब से निशांत जेल में है। कानपुर के दोनों वैज्ञानिकों के खिलाफ साक्ष्य न मिलने के कारण उनको क्लीन चिट दी गई थी।
पाकिस्तान व अमेरिका की खुफिया एजेंसी को दी थी जानकारी
एटीएस ने खुलासा किया था कि निशांत करीब दो साल से हनीट्रैप में फंसा था। सोशल मीडिया के जरिये पाकिस्तान व अमेरिका की खुफिया एजेंसी को रक्षा व मिसाइल संबंधी जानकारियां दी थीं। मिसाइलों व कई चीजों की फोटो भी भेजे थे। जांच में पता चला था कि सौ से अधिक पाकिस्तानी फेक फेसबुक आईडी आईएसआई द्वारा चलाई जा रही हैं।
महिला के बारे में नहीं मिली जानकारी
एटीएस की जांच में खुलासा हुआ था कि आईएसआई की महिला हैंडलर ने दिल्ली से बैठकर निशांत को हनीट्रैप में फंसाया था। आईपी एड्रेस ट्रेस करने से इसकी जानकारी हुई थी। लेकिन अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि वह महिला हैंडलर कौन थी और कहां है।