अनुकृति रंग मंडल के कलाकारों ने अपने अभिनय से पटनावालों का दिल जीत लिया। बहुरंगरूपिया महोत्सव के तहत बिहार की राजधानी पटना के प्रेमचंद रंगशाला में अनुकृति रंगमंडल कानपुर की प्रस्तुति ‘जांच पड़ताल’ नाटक देखकर हर कोई हैरान रह गया। पटना के लोगों ने कानपुर की प्रतिभा की खूब सराहना की। नाटक के हर एक डायलॉग ने लोगो की तालियों की गड़गड़ाहट बटोरी। डॉ. ओमेन्द्र वर्मा ने बताया कि इस नाटक पूरे देश में खूब सराहा जा रहा है।
यह थी जांच पड़ताल की कहानी
एक छोटा शहर या फिर राज्य जहां सिर से नख तक हर सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार व्याप्त है। वहां के मेयर गजेंद्र बाबू को एक दिन खबर मिलती है कि केंद्र ने राज्य की जांच पड़ताल के लिए उच्च अधिकारियों ने एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया है। मेयर साहब एक इंमरजेंसी मीटिंग में मजिस्ट्रेट संकटा प्रसाद सिविल सर्जन, डिस्ट्रिक स्कूल इंस्पेक्टर (डीआईओएस), पोस्टमास्टर और कोतवाल आदि सभी अफसर इस बिन बुलाई मुसीबत से निजात पाने के लिए उपाए खोजते है। संयोग से इसी दौरान एक होटल में दिल्ली से आए एक युवक को ये सभी दिल्ली वाला अफसर समझ लेते हैं। मेयर साहब खुद और अपने अफसरान को बचाने की नियत से इस युवक कुमार को मेहमान बनाकर होटल से अपने घर ले जाते है। मेयर की दूसरी पत्नी इमरती देवी और पहली पत्नी की बेटी बेबी के बीच कुमार को पटाने की होड़ सी लगी है। एक दिन मौका देख अफसर के भ्रष्ठ आचरण से बुरी तरह परेशान व्यापारी कुमार से शिकायत करने पहुंच जाते हैं। बीच बीच में मेयर के मुंह लगे सेवक गोवर सिंह, झुलन, लोटा प्रसाद और चिलमची मियां अनायास ही हास परिहास के नए मौके दर्शकों के समक्ष परोसते हैं। मेयर उनके अफसरों और व्यापारियों से लंबी रकम वसूल कर कुमार रफूचक्कर हो जाता है। तब कहीं जाकर यह राज खुलता है कि वह जांच अधिकारी नहीं एक साधारण युवक था। तभी सर्किट हाउस का चपरासी मेयर साहब के बंगले पहुंच कर बताता है कि केंद्र से भेजा गया सचमुच का जांच अधिकारी पहुंच चुका है।
पात्र परिचय
गजेंद्र बाबू मेयर- महेंद्र धुरिया
स्कूल इंस्पेक्टर- सुरेश श्रीवास्तव
सिविल सर्जन- अनिल निगम
पोस्टमास्टर- मनोहर सुखेजा
चिल मची मियां- अजय प्रताप सिंह
बेबी - दीपिका सिंह
इमरती देवी-प्रिया नीलम मिश्रा