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Kanpur News: बिगड़ा खानपान बढ़ा रहा बड़ी आंत का कैंसर

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कानपुर। खाने में रेशेदार चीजों का इस्तेमाल घटने से बड़ी आंत के कैंसर के मामले बढ़ने लगे हैं। आंत के कैंसर का शुरुआत में पता नहीं चलता। ज्यादातर रोगियों को एनीमिया के लक्षण उभरते हैं। रोगी एनीमिया और बवासीर का इलाज कराते रहते हैं। विशेषज्ञों के पास तीसरी और चौथी अवस्था में बहुत पाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पहली और दूसरी अवस्था में इलाज मिले तो रोगी पूरी तरह ठीक हो सकता है।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर सर्जन डॉ. आरके जौहरी और आगरा की डॉ. अंशिका मित्तल ने बताया कि 10 साल में बड़ी आंत (कोलोरैक्टल) कैंसर के रोगी दोगुना हो गए हैं। उन्होंने बताया कि लो फाइबर डाइट और रिफाइंड खाद्य पदार्थ इसकी बड़ी वजह हैं। पहले ओपीडी में कोलोरैक्टल कैंसर के औसत तीन रोगी आते थे और अब छह रोगी आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि रेशेदार खाद्य पदार्थों का सेवन न करने से कब्ज की स्थिति होती है। मल के अधिक समय तक आंत में रुकने से रसायनों का रिसाव होता है। इससे सूजन होती है और गांठ बन जाती है। इससे खून का रिसाव होता है लेकिन रोगी को पता नहीं चलता।
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जब इमरजेंसी होती है तो रोगी अस्पताल आते हैं। इंडोस्कोपी जांच से कैंसर की पुष्टि होती है। बड़ी आंत के अंदर और इसके मुंह पर कैंसर होता है। लेकिन रोगी नासमझी में बवासीर का इलाज कराने लगते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक आंत के कैंसर का एक लक्षण एनीमिया भी है। अगर शरीर में खून की कमी बनी हुई है। दवाओं से ठीक नहीं हो रही तो एक बार बड़ी आंत की जांच कराना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जंक फूड, फास्ट फूड आदि में रेशेदार चीजें नहीं होती। इसके सेवन से बचना चाहिए।

स्तनपान न कराने वाली माताओं को कैंसर का खतरा अधिक
सैफई के विशेषज्ञ डॉ. सोमेंद्रपाल सिंह चौहान ने शोधों के हवाले से बताया कि बच्चों को दूध न पिलाने वाली माताओं को स्तन कैंसर का खतरा अधिक होता है। दूध न पिलाने से शरीर में एस्ट्रोजन केमिकल का लेवल बढ़ जाता है। शरीर में हारमोनल बदलाव आता है। इसकी वजह से कैंसर की स्थिति पैदा हो जाती है। कम उम्र की स्तन कैंसर की रोगी भी अस्पताल में आने लगी हैं।
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