कानपुर। विश्व स्वास्थ्य दिवस जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के कॉलेज ऑफ नर्सिंग में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. राज तिलक ने कहा कि बच्चों और महिलाओं की सेहत पर सबसे कम ध्यान दिया जा रहा है। इनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की नुमाइंदगी करने वाला कोई नहीं। जो शोर करते हैं, उनके लिए ही योजनाएं बनती हैं। उन्होंने बताया कि कम वजन के पैदा होने वाले बच्चों को आगे चलकर डायबिटीज, फैटी लिवर, हाइपरटेंशन की दिक्कत अधिक होती है।
आंकड़ों के हवाले से डॉ. तिलक ने बताया कि अभी भी 16.5 फीसदी टीन ऐज प्रेगनेंसी होती हैं। कम उम्र में लड़की मां बनती है, अधिक बच्चे पैदा करती है तो उसकी सेहत खराब होती है। उन्होंने कहा कि बच्चे को कुपोषण मां के पेट से होता है। ऐसे बच्चे कम वजन के पैदा होते हैं। इनके शरीर की प्रोग्रामिंग ऐसी होती है कि बड़े होने पर बीमारियों का खतरा रहता है। अन्य वक्ताओं ने कहा कि ऐसी दिनचर्या और खानपान अपनाना चाहिए जिससे बीमारियां दूर रहें। इस मौके पर डॉ. संगीता आर्या, प्रोफेसर बीआर कुशवाह, प्रधानाचार्य डॉ. नवीन, डॉ. सोनिया मौजूद रहीं।