धूमधाम से किया जाएगा टेसू झेंझी का विवाह
बुजुर्गों ने बताया कि यह केवल एक खेल नहीं है, बल्कि अटूट प्रेम, फसल की खुशहाली और गांव की एकता का प्रतीक है। गांव के लोगों का कहना है कि वे हर साल इसी तरह टेशू-झेंझी का ब्याह रचाते हैं, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी पुरानी संस्कृति से जुड़ी रहे। आधुनिकता की चकाचौंध में भी ग्रामीणों ने अपनी इस विरासत को सहेज कर रखा है। परिजनों ने बताया कि हल्दी रस्म के बाद पूर्णिमा के दिन बड़ी धूमधाम से टेसू झेंझी का विवाह किया जाएगा। वहीं, ऐसी मान्यता है कि टेसू झेंझी के ब्याह के बाद सहालग का दौर शरू हो जाता है।