नारी को ममता का रूप कहा जाता है। ममता का रूप नारी घर ही नहीं बल्कि समाज सुधारक है। नवरात्र में अमर उजाला हर दिन कुछ ऐसी समकालीन महिलाओं के बारे में बता रहा है जो नौ देवी के रूपों के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। आज हम आपको बताएंगे मां स्कंदमाता के बारे में। इसमें उन महिलाओं के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने समाज में अलख जगाई और महिलाओं को प्रेरित किया।
पति की मौत के बाद नहीं मानी हार, शुरू किया एनजीओ
शादी के बाद आंखों में सपने लिए ससुराल में कदम रखने वाली कानपुर के बर्रा निवासी पायल शुक्ला की खुशियों को मानो किसी की नजर लग गई। 2015 में शादी के एक साल बाद ही उनके पति और सेंट्रल एक्साइज इंस्पेक्टर अनिमेष की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। परिवार के ऊपर तो मानो वज्रपात हो गया। सदमे से उबरना किसी के लिए आसान नहीं था, लेकिन पायल ने न केवल खुद को संभाला बल्कि अपने परिवार को संभाला और पति के नाम पर एनजीओ का गठन किया। पायल कहती हैं कि घूंघट के भीतर मुंह ढंककर रोने के बजाय मैंने उनके नाम को जिंदा रखने की ठानी। उनके नाम से एनजीओ शुरू किया। उसी एनजीओ के माध्यम से गरीब बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रही हूं। साथ ही 10 बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाती हूं। इसके अलावा ब्लड डोनेशन के कैंप भी लगवाती हूं, ताकि हादसे में शिकार व्यक्ति को खून के लिए न परेशान होना पड़े।