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सच्चा बंधन: ‘सांसें थमीं तो सफर थमा', अर्थी पर पत्नी की मांग में भरा सिंदूर, फिर पति ने तोड़ा दम, ऐसा था मंजर

Wed, 22 Jul 2026 08:43 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया

सार

Auraiya Husband-Wife Death News: मधवापुर गांव में टीबी से पीड़ित पत्नी की मौत का सदमा उसका पति बर्दाश्त नहीं कर सका।  मंगलवार को पत्नी की अंत्येष्टि की तैयारी के दौरान मांग में सिंदूर भरते वक्त पति की भी मौत हो गई। एक साथ दोनों की अर्थी उठने से पूरे गांव में मातम छा गया है।
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Auraiya Husband-Wife Death - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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विवाह के मंडप में सात फेरे लेते हुए पति-पत्नी अग्नि को साक्षी मानकर वचन लेते हैं कि जिंदगी भर साथ जिएंगे। कई बार यह वचन दोनों को प्रेम के ऐसे अटूट धागे में बांध देता है, जहां वाकई एक की मौत दूसरे की जिंदगी भी खत्म कर देती है। ऐसा ही वाकया मंगलवार को औरैया जिले के गांव मधवापुर में सामने आया। यहां टीबी की बीमारी से पत्नी की मौत का सदमा पति भी बर्दाश्त नहीं कर सका।

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पत्नी की अंत्येष्टि की तैयारी के दौरान उसकी मांग में सिंदूर भरते समय पति ने भी दम तोड़ दिया। गांव में एक साथ दोनों की अर्थी उठी तो कोई भी अपने आंसू नहीं रोक पाया। इसके बाद पति-पत्नी दोनों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। गांव मधवापुर निवासी श्यामल दास (40) की पत्नी पिंकी (35) चार साल से टीबी की बीमारी से ग्रसित थी। उनका कानपुर में प्राइवेट अस्पताल से इलाज चल रहा था।

पिंकी के शव के पास बैठा रहा श्यामल दास
सोमवार की शाम पिंकी की हालत ज्यादा बिगड़ गई। पति व गांव वाले जब तक उसे अस्पताल ले जाते, पिंकी की मौत हो गई। रात भर श्यामल दास पिंकी के शव के पास बैठा रहा। कभी वह पिंकी का चेहरा देखता तो तभी उसका हाथ पकड़कर रोने लगता और कहता, तुम मुझे ऐसे अकेला छोड़कर कैसे जा सकती हो, तुम तो मेरे बिना एक पल भी नहीं रहती थीं।

माता-पिता की मौत के बाद अनाथ हुए दिव्यांशु व देव - फोटो : amar ujala
मांग में सिंदूर भरते समय लड़खड़ाकर गिर गया
जैसे-तैसे रोते बिलखते रात बीत गई। मंगलवार सुबह पिंकी के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। तभी उसकी मांग में सिंदूर भरते समय पति श्यामलदास वहीं लड़खड़ाकर गिर गया। वह पत्नी की मौत का सदमा बर्दाश्त न कर सका और उसकी भी मौत हो गई। उधर, पत्नी के बाद पति की मौत से परिवार और पूरे गांव में मातम छा गया। ग्रामीणों ने बताया कि श्यामल दास पत्नी से बहुत प्रेम करता था।

चचेरे भाई ने अंतिम संस्कार किया
बीमारी में उसने पत्नी की बहुत सेवा की थी। हमेशा कहता था कि पिंकी को कुछ हो गया तो वह भी जिंदा नहीं रह पाएगा। वह पूरी रात बेसुध होकर रोता रहा। उधर, श्यामलदास के ससुर रामसनेही ने दोनों के अंतिम संस्कार का इंतजाम कराया। ग्रामीणों ने दोनों की अर्थी एक साथ उठाई और नदी किनारे एक साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया। श्यामलदास के चचेरे भाई सुनील ने अंतिम संस्कार किया।

घर में रोती बिलखती महिलाएं - फोटो : amar ujala
अनाथ हो गए दोनों बच्चे, नाना ने ली जिम्मेदारी
मधवापुर निवासी श्यामलदास व पत्नी पिंकी की मौत के बाद उनके दो बेटे अब अनाथ हो गए हैं। उधर, श्यामलदास के ससुर ने दोनों बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी ली। ग्रामीणों ने बताया कि श्यामलदास भूमिहीन था। पत्नी की बीमारी के कारण वह मजदूरी भी नहीं कर पा रहा था। उसके घर की आर्थिक स्थिति दिन पर दिन खराब होती गई। अब दोनों की मौत के बाद दो पुत्रों देव (7) और दिव्यांशु (9) अनाथ हो गए हैं। श्यामलदास के दो पुत्रियां भी थीं, लेकिन कई साल पहले दोनों की मौत हो चुकी है।

प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाएंगे प्रधान
श्यामलदास की ससुराल कन्नौज जनपद के थाना ठठिया गांव मलगवां में है। ससुर रामसनेही ने बताया कि दामाद श्यामलदास के हिस्से में महज दो बीघा नदी से सटी ऊबड़-खाबड़ जमीन थी। पैदावार न होने के चलते वो मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता था। वह परिवार के साथ तमिलनाडु में भी रहने गया था। जहां मजदूरी करता था लेकिन पिंकी की तबीयत बिगड़ने पर डेढ़ साल पहले पूरा परिवार मधवापुर आ गया था। ग्राम प्रधान रामनरेश बाथम ने बताया कि श्यामलदास के मकान में एक कमरा और बरामदा है। बाहर टट्टर लगा है। बच्चों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया जाएगा।

एक साथ सजाईं गईं अर्थी - फोटो : amar ujala
स्कूल नहीं जाते दोनों बच्चे
श्यामलदास के ससुर राम सनेही ने बताया कि तमिलनाडु में देव कक्षा-2 और दिव्यांशु कक्षा-3 तक पढ़ रहा था। बेटी के औरैया लौटने के बाद से दोनों बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे। दोनों बच्चों के स्कूल न जाने का यह मामला स्कूल चलो अभियान की पोल खोल रहा है। खास बात तो यह है कि गांव में दो सरकारी स्कूल हैं। ड्राप आउट बच्चों पर सरकारी तंत्र की नजर ही नहीं पहुंची थी। अब हादसे के बाद यह खामी सामने आई है।
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अनाथ हुए बच्चों को बाल सेवा योजना के तहत लाभ दिया जाएगा। अन्य जो भी सरकारी योजनाओं की पात्रता होगी। उसके अनुसार बच्चों को लाभ मिलेगा। इसके लिए क्षेत्रीय लेखपाल को निर्देश दिए गए हैं।  -ब्रह्मानंद, एसडीएम सदर
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