दस्तावेज जुटाने का करता था मुख्य काम
इसके बाद फर्जी किरायानामा और बिजली बिल तैयार कर जीएसटी पोर्टल पर फर्जी फर्में पंजीकृत कराई जाती थीं। इन बोगस फर्मों के जरिए बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के फर्जी बिल जारी किए जाते थे और अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम कर सरकार को करोड़ों की चपत लगाई जा रही थी। अब तक की जांच में करीब 2.29 करोड़ रुपये की कर चोरी का मामला सामने आया है। गिरफ्तार किए गए श्याम सुंदर पासवान भोले-भाले लोगों को बरगलाकर दस्तावेज जुटाने का मुख्य काम करता था।
ये सामान हुआ बरामद
वहीं, अशोक कुमार पासवान कंप्यूटर पर दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर फर्जी कंपनियां तैयार करने का एक्सपर्ट है। महावीर शरण उर्फ पहाड़िया बोगस फर्मों के माध्यम से आईटीसी पास-ऑन करने और राजस्व चोरी का मास्टरमाइंड है। विमल कुमार अपने नाम पर फर्जी फर्म बनवाकर कमीशन और आर्थिक लाभ लेता था। आरोपियों के पास से पुलिस ने दो लैपटॉप, आठ एंड्रॉइड व नौ कीपैड मोबइल फोन, आठ पासबुक, सात डेबिट कार्ड, 12 आधार कार्ड, 11 रजिस्टर बरामद किया है। इसके अलावा आरोपियों के पास से 20 सिम कार्ड और छह हजार रुपये नकद बरामद किए गए।