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औरैया: विद्युत चोरी के आरोपी से 15 हजार ठगने का प्रयास, फर्जी दरोगा समेत दो गिरफ्तार

Sun, 04 Oct 2026 05:16 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया

सार

युवक पर केस दर्ज होने के बाद ट्रूकॉलर पर दरोगा का नाम दिखाकर रंगदारी की मांग की थी। यूपी कॉप ऐप से डेटा चुराकर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया।
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पुलिस गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विद्युत चोरी के मामले में केस दर्ज न करने और फर्जी सेटलमेंट के नाम पर पुलिस अधिकारी की पहचान का दुरुपयोग कर ठगी करने वाले गिरोह का साइबर थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने ककोर बम्बा के पास से फर्जी दरोगा समेत दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए गए तीन एंड्रॉइड मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

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बीती 20 अगस्त को प्रवर्तन दल (विद्युत विभाग) के अवर अभियंता होरीलाल की संयुक्त टीम ने कोतवाली औरैया क्षेत्र के ग्राम निगडा में चेकिंग अभियान चलाया था। इस दौरान उपभोक्ता ओमकांत चतुर्वेदी को बिजली चोरी करते पाया गया। 21 अगस्त को थाना विद्युत चोरी निरोधक में उपभोक्ता के खिलाफ धारा 135 भारतीय विद्युत अधिनियम के तहत मामला (मु0अ0सं0 642/2026) दर्ज कराया गया।

मामला दर्ज होने के अगले ही दिन (22 अगस्त) ओमकांत के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। ट्रूकॉलर पर कॉलर का नाम 'दरोगा कृष्णकांत प्रजापति' दिखाई दे रहा था। कॉलर ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए केस खत्म करने के एवज में 15,000 की मांग की और व्हाट्सएप पर क्यूआर कोड भेज दिया। पीड़ित उपभोक्ता ने इसकी जानकारी तुरंत अवर अभियंता को दी। इसके बाद अवर अभियंता की तहरीर पर साइबर थाने में बीएनएस व आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया।
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तकनीकी व मैनुअल साक्ष्यों के आधार पर साइबर थाना प्रभारी राजीव कुमार और उपनिरीक्षक हेमंत चौधरी की टीम ने रविवार को मध्य प्रदेश के जनपद निवाड़ी स्थित थाना पृथ्वीपुर क्षेत्र के गांव ज्योरामोरा निवासी कृष्णकांत यादव, थाना पृथ्वीपुर क्षेत्र के गांव  गोवा पश्चिम निवासी मोहित यादव  ककोर बम्बा के पास से दो अभियुक्तों को दबोच लिया। पूछताछ में अभियुक्तों ने चौंकाने वाला खुलासा किया।

उन्होंने बताया कि उनका एक साथी यूपी कॉप जैसे ऑनलाइन माध्यमों से दर्ज मुकदमों के आरोपियों के नाम, पते और मोबाइल नंबर निकालकर उन्हें देता था। इसके बाद वे फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर पीड़ित को कॉल करते थे और मामला रफा-दफा करने के नाम पर पैसों की मांग करते थे। ठगी की रकम फर्जी और लालच देकर खुलवाए गए बैंक खातों में क्यूआर कोड के जरिए मंगवाई जाती थी।

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