अंतिम रूप देने में जुटे हैं कारीगर
कमेटी के सदस्यों व लोगों का सहयोग हमेशा सराहनीय रहा है। खास बात यह है कि ये कारीगर जहां एक ओर दशहरे के सीजन में रावण का पुतला तैयार करते हैं। वहीं, मुहर्रम के दिनों में ताजिए भी बनाते हैं। 60 फीट ऊंचे पुतले को अंतिम रूप देने में तीन से चार कारीगर लगन से जुटे हुए हैं। पुतले के निर्माण में मुख्य रूप से बांस की लकड़ी, कागज और बोरियों का उपयोग किया जा रहा है।
80-90 हजार तक की लागत
इसे तैयार करने में लगभग 80 से 90 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की लागत का अनुमान है। कमेटी के कोषाध्यक्ष अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि पुरानी नुमाइश मैदान में रावण दहन का यह आयोजन लंबे समय से होता आ रहा है। इस मौके पर सदस्य गोपालजी दुबे, बबलू दुबे, अमर मिश्रा, पिंटू अग्निहोत्री, राणा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।