कानपुर। सुकून-ए-दिल की तलाश में न इधर गया, न उधर गया-मुझे संग-ए-दर पर अमां मिली, मैं वहीं पे जाकर ठहर गया। संस्था रसखान के 32वें कवि सम्मेलन और मुशायरे की शुरुआत शायर अतीक फतेहपुरी ने इस गजल से की। यह शेर संस्था के रूहानी सरपरस्त हजरत शाह मंजूर आलम (रह.) का पसंदीदा रहा है। इसके बाद महफिल में एक के बाद दीगर शायर ने गजब का समां बांधा।
कार्यक्रम का आयोजन सिविल लाइंस स्थित सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स में किया गया। सबसे पहले हजरत शाह मंजूर आलम (रह) की फोटो पर माल्यार्पण किया गया। दीप जलाकर महफिल की शुरुआत हुई। अतीक फतेहपुरी के बाद उरई के पुष्पेंद्र पुष्प ने अपना कलाम पेश किया। उनका यह शेर राधा ने बस अपने तक महदूद रखा-मीरा ने घनश्याम उतारा कागज पर बहुत पसंद किया गया। बुजुर्ग शायर जहीर कानपुरी ने जब अपना कलाम जरूर आपस में दोनों का कोई रिश्ता निकलता है, चिराग-ए-शाम भी जलता है, मेरा दिल भी जलता है, सुनाया तो हर तरफ से वाह-वाह की आवाज आई।
भरतदीप माथुर का कलाम अब तक तो सलीके से सोचा भी नहीं तुमको-तुम हो के तसव्वुर से बाहर भी निकल आए खूब पसंद किया गया। जीशान नियाजी का शेर सौ बार टूटने पर भी हारा नहीं हूं मैं, मिट्टी का इक चिराग हूं तारा नहीं हूं मैं पसंद किया गया। मुशायरे में तारिक कमर, सलीम शीराजी, लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, राजेश रेड्डी, शकील जमाली, चरण सिंह बशर, अज्म शाकरी, अफजल मंगलौरी, शाहिद अनवर, अफजल इलाहाबादी, मारूफ रायबरेलवी, सुधीर बेकस आदि ने अपना कलाम पेश किया।
मुख्य अतिथि डॉ. नीता जैन ने रमन हितकारी की पुस्तक आशियाना मकरावटगंज का विमोचन किया। मुशायरे की अध्यक्षता सलीम शीराजी और संचालन अब्बास रजा नय्यर जलालपुरी ने किया। इस मौके पर सईद नकवी, कवि मुकेश, नूरैन फैजाबादी, अख्तर कानपुरी तथा संस्था रसखान के पदाधिकारियों में एसके वर्मा, मुकुंद मेहरोत्रा, अरुण कुमार श्रीवास्तव, सरवर अली खान, धर्मेंद्र किशोर त्रिपाठी, अरुण निगम, प्रांजल त्रिपाठी, नजीब अहमद खां, सुहेल अहमद खां आदि मौजूद रहे।