भीतर नक्सलियों ने और बाहर से आतंकियों ने हमारे देश के चमकते सितारों को हमेशा के लिए बूझा दिया। हैरानी की बात ये है कि नेता सिर्फ इसकी निंदा ही करने में लगे रहे। सवाल उठ रहा है कि पठान कोट, उरी, सुकमा और कुपवाड़ा के बाद भी क्या एक और ऐसाी घटना का इंतजार है। सवा करोड़ लोगों के कंधे अब झुकने लगे है। जनता 'सर्जिकल स्ट्राइक टू' मांग रही है...
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कैप्टन आयुष यादव के घर के बाहर खड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
शहीद हुए कैप्टन आयुष यादव की मां कहना हैं कि अगर सरकार से कुछ न हो रही हो तो मुझे बम ला कर दे दो, मै खुद सरहद पर लडऩे को तैयार हूं। ऐसे बयान जब शहीदों की मां देने लगे तो आप स्थिति समझ सकते हैं। ऐसे में सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।
कैप्टन आयुष को श्रद्धा सुमन अर्पित करने पहुंचे रविकांत तिवारी ने कहा पिछले तीन वर्षोंं से हादसे ही हादसे हो रहे है। इस पर सिर्फ सरकार की विफलता नजर आ रही है। नरेंद्र मोदी को जिस उम्मीद पर चुना गया है उस पर उन्हें खरा उतरना चाहिए। सरकार को अपना नम्र स्वभाव छोड़ कर अब सेना को हाथ खोलने का मौका देना चाहिए। सरकार अपनी सेना को पत्थर खाने पर मजबूर न करे बल्कि जो कोई सेना के साथ ऐसा करे उन्हें देखते ही गोली मारने के आदेश दे।
शहीद आयुष यादव के घर के बाहर गूंजे नारे
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
वहीं मनोज सेंगर ने सेना पर हमलों को लेकर कहा ये डबल स्टैंडर्ड के परिणाम हैं। इन्होंने कहा सरकार एक तरफ बातचीत कर पाकिस्तान से रिश्ते कायम करने की बात कहते हैं, दूसरी तरफ हम चाहते हैं देश में शांति कायम रहे लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया। हमेशा एक ही नीति पर चलने पर आदमी को सफलता प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा इजरायल एक छोटा सा देश है लेकिन उसने अपने दुश्मनों से घिरे होने के बावजूद भी किसी को एक तिनका तक अपने यहां फेंकने तक की अनुमति नहीं दी है और उसने अपने सारे नागरिकों को सैनिक बनाया है। जब-जब उन्हें जरूरत होती है तो सारा देश एकजुट होकर मुसीबत का सामना करता है।
कैप्टन आयुष के घर यूं लगा रहा तांता
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
भारत में भी अगर इसी प्रकार की स्थिति होगी तभी हम कश्मीर को आतंकवाद से आजाद करा पाएंगे। इन्होंने यह भी कहा कि पत्थर फेंरने वाले से हमारे एके-47 लिए जवान मुकाबला न कर पाए इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या होगी। गोलियां किस दिन के लिए बचाकर रखी गई है, बंदूक किस दिन के लिए होती है और सेनाए किस दिन के लिए सीमा पर खड़ी की जाती है।
यहीं वो दिन है, यही वो समय है और यही वो अवसर है जब सेनाओंं को मुंहतोड़जवाब देने की इजाजत दी जानी चाहिए। तोपों के मुंह खोल दिए जाने चाहिए। पत्थर फेंकने वाले व्यक्ति ही नहीं, कश्मीर और देश की तरफ आंख उठाने वाले व्यक्ति की हमें आंख निकाल लेनी चाहिए। जब हम इस नीति पर चलेंगे तब हमारा देश सुरक्षित होगा। अन्यथा हमारे देश की माताओं की कोख इसी प्रकार से सूनी होती रहेगी। यहां पहुंचे लोगों ने शहीद कैप्टन आयुष यादव की तस्वीर के सामने श्रद्धासुमन अर्पित कर एक आवाज में कहा 'वी वांट सर्जिकल स्ट्राइक टू'