स्थायी लोक अदालत ने एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी का तर्क यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जरूरी नहीं है कि हादसे वाले जिले या वाहन के रजिस्ट्रेशन वाले जिले की ही कोर्ट में मुकदमा दायर किया जाए। कोई भी व्यक्ति अपने जिले की कोर्ट में मुकदमा दर्ज करा सकता है।
अदालत ने बीमा कंपनी से वाहन की मरम्मत में खर्च एक लाख पांच हजार 870 रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया। यह भी कहा है कि मुकदमा दायर करने की तिथि 30 नवंबर 2012 से भुगतान की तिथि तक दस प्रतिशत ब्याज दिया जाए।
गुवा गार्डेन कल्याणपुर निवासी फजलूर्रहमान ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड शाखा मकरंद नगर कन्नौज के खिलाफ स्थायी लोक अदालत में मुकदमा दाखिल किया था।
इसमें कहा था कि उनकी कार सनी ट्योटा की पालिसी 17 सितंबर 2012 तक मान्य थी। 29 अक्टूबर 2011 को लखनऊ में दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गई थी। कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधक से बात करने के बाद गाड़ी की मरम्मत कराई। इस पर एक लाख पांच हजार 870 रुपये खर्च आया।
बीमा कंपनी ने फिटनेस न होने की बात कह मरम्मत खर्च नहीं दिया। कहा कि दुर्घटना लखनऊ में हुई। गाड़ी का रजिस्ट्रेशन कन्नौज में हुआ है। इसलिए यह मामला कानपुर की कोर्ट के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है।
अधिवक्ता विजय बक्शी ने बताया कि लोक अदालत के अध्यक्ष सुभाष चंद्र, सदस्य राकेश भार्गव और आशा सिंह ने फैसला सुनाते हुए कहा कि वादी कानपुर का रहने वाला है। इसलिए यहां की कोर्ट में मुकदमा दायर कर सकता है। बीमा कंपनी मरम्मत खर्च का भुगतान करे।