कानपुर। देश की 17,000 मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर अलार्म लगाने और जनता को जागरूक करने का रिसर्च प्रोजेक्ट आईआईटी कानपुर को मिला है। इसके लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने 46.30 लाख रुपये के बजट का प्रावधान किया है। यह रिसर्च प्रोजेक्ट नौ महीने के भीतर पूरा किया जाना है। प्रोजेक्ट रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) की मदद से पूरा होगा।
मानव रहित क्रासिंग पर आए दिन दुर्घटना होती है। इसे देखते हुए आईआईटी कानपुर और रेलवे बोर्ड के बीच समझौता हुआ है। इसका जिक्र गुरुवार को संसद में पेश बजट के पेज नंबर 30-31 के आर्टिकल-67 में भी है। आईआईटी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में मुख्य इंजीनियर बीएम शुक्ला ने बताया कि अलार्मिंग सिस्टम से दुर्घटनाओं पर जरूर अंकुश लगेगा। जो तकनीक है, उसके मुताबिक हर मानवरहित क्रासिंग पर अलार्म लगाया जाएगा। इसका लिंक रेलवे ट्रैक से रहेगा। ट्रेन जब मानवरहित क्रासिंग से दो किलो मीटर दूर रहेगी, तभी अलार्म बजने लगेगा। अलार्म में विशेष हूटर लगेगा जिसकी आवाज 600 मीटर तक सुनाई पड़ती है। ट्रेन के क्रासिंग के नजदीक आते ही हूटर की आवाज और तेज हो जाएगी। इससे वाहन चालक और राहगीर अलर्ट हो जाएंगे। मुख्य इंजीनियर ने कहा कि यह पहला मौका है, जब रिसर्च को समयसीमा में बांधा गया है। यह दिखाता है कि तकनीक को लेकर रेलवे विभाग सतर्क हुआ है। प्रोजेक्ट का बजट मार्च 2015 में मिल जाएगा। पांच महीने में तकनीक का प्रोटोटाइप मॉडल बनाकर रेल मंत्रालय को देना है। रिसर्च वर्क नौ महीने में पूरा हो जाएगा। मुख्य इंजीनियर ने कहा कि रेल मंत्रालय देश की 3500 अनमैंड रेलवे क्रासिंगों को बंद कर सकता है।
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आईआईटी की है बायो टॉयलेट तकनीक
बायो टॉयलेट की तकनीक भी आईआईटी कानपुर की है। प्रो. विनोद तारे की अध्यक्षता वाली टीम ने विशेष टॉयलेट बनाया है, जिसका सफल परीक्षण इलाहाबाद के कुंभ मेला में किया जा चुका है। बायो टॉयलेट में पानी के रिसाइकिलिंग की व्यवस्था है, जिसका इस्तेमाल दोबारा किया जा सकता है। जो कचरा होगा, उसकी जैविक खाद बनाई जा सकती है। यह तकनीक रेलवे स्टेशन को साफ-सुथरा बनाने में मददगार साबित हो सकती है। बताते चलें कि रेल मंत्री ने ट्रेनों में 17000 बायो टॉयलेट लगवाने का ऐलान रेल बजट में किया है।