कानपुर। विश्व अस्थमा दिवस पर आईएमए के विशेषज्ञों ने बताया कि इन्हेलर को लेकर कोई भ्रम न पालें। यह अस्थमा के उपचार का सटीक तरीका है। इसके माध्यम से दवा सीधे फेफड़ों में पहुंचती है। इससे शरीर के दूसरे अंगों पर अधिक असर नहीं होता है। इसके साथ ही अस्थमा के कारणों, बचाव और उपचार के तरीके के संबंध में जानकारी दी। उनका कहना था कि जो अस्थमा अटैक के कारण होते हैं, उनसे बचना चाहिए। सांस की बीमारियां प्रदूषण तथा सिगरेट, बीड़ी की लत की वजह से बढ़ रही हैं।
आईएमए की अध्यक्ष डॉ. नंदिनी रस्तोगी ने पत्रकारों को बताया कि इस साल अस्थमा दिवस की थीम सभी के लिए इन्हेलर उपचार सुलभ बनाएं, रखी गई है। अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जो बच्चे से लेकर बड़े तक को परेशान करती है। यह एक गंभीर लेकिन नियंत्रित करने योग्य बीमारी है। सही समय पर पहचान, नियमित इन्हेलर उपयोग और ट्रिगर से बचाव से रोगी सामान्य जीवन जी सकते हैं। इस मौके पर जीएसवीएम मेडिसिन विभाग के रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अवधेश कुमार ने इन्हेलर से जुड़ी शंकाओं और मिथक के बारे में बताया। इस मौके पर आईएमए उपाध्यक्ष डॉ. कुणाल सहाय, सचिव डॉ. विकास मिश्रा, डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, डॉ. सुधीर चौधरी, डॉ. एके सिंह आदि विचार व्यक्त किए।