कानपुर। दुर्घटना में हाथ खो चुके लोगों के लिए आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप लाइफ और लिंब ने एक नई उम्मीद जगाई है। इस स्टार्टअप ने ऐसा कृत्रिम हाथ विकसित किया है, जो न केवल 10 किलो तक वजन उठा सकता है बल्कि सामान्य हाथ की तरह उंगलियों को भी संचालित कर सकता है। थोड़े अभ्यास के बाद उपयोगकर्ता इस कृत्रिम हाथ से हस्ताक्षर तक कर सकता है। टेककृति और अभिव्यक्ति कार्यक्रम के दौरान आयोजित स्टार्टअप प्रदर्शनी में इसका प्रदर्शन किया गया, जिसे लोगों ने काफी सराहा।
स्टार्टअप के संस्थापक निशांत अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने दो प्रकार के कृत्रिम हाथ विकसित किए हैं। एक कोहनी के नीचे के लिए और दूसरा कोहनी के साथ है। इस हाथ का वजन मात्र 490 ग्राम है। वर्तमान में हैदराबाद, कोलकाता और बंगलूरू में 300 से अधिक लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। शहर में भी एक महिला को यह कृत्रिम हाथ दिया गया है। यह स्मार्ट सेंसर (एआई-एमएल) तकनीक पर आधारित है, जो मांसपेशियों के दबाव को ईएमजी सेंसर के माध्यम से पहचानकर कार्य करता है। अभी यह 18 रंगों में उपलब्ध है। करीब साढ़े पांच लाख रुपये कीमत वाले इस कृत्रिम हाथ से कई कार्य आसानी से कर सकते हैं।
टेककृति में नवाचार और तकनीक पर मंथन
आईआईटी कानपुर का वार्षिक तकनीकी एवं उद्यमिता महोत्सव टेककृति 26 दूसरे दिन भी उत्साह और नवाचार से भरपूर रहा। शुरुआत मेजर जनरल सीएस मान, वीएसएम, एडीजी, आर्मी डिजाइन ब्यूरो के संबोधन से हुई। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों और नवाचार की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके बाद आयोजित मेडटेक पैनल चर्चा में एरिक ग्रिमसॉन, जगदीश थम्पी और राजीव छिब्बर जैसे विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चा में हेल्थकेयर तकनीक के उभरते रुझानों, चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार साझा किए गए। वहीं, एआई समिट में संदेश गोयल और मौना नीलकंठा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य और उसके प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की। दिन का समापन ईडीएम नाइट के साथ हुआ, जिसने पूरे परिसर को ऊर्जा और संगीत से सराबोर कर दिया।
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बिना रनवे उड़ान भरेगा एटोस-270 ड्रोन
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के स्टार्टअप पायरिजन टेक्नोलॉजी ने भी अपने नवाचार से ध्यान आकर्षित किया। इसके को-फाउंडर कुलदीप शर्मा और क्षितिज गांधी ने बताया कि उनका एटोस-270 ड्रोन अमेरिका के बी-2 बॉम्बर से प्रेरित है। यह बिना रनवे के सीधे उड़ान भर सकता है और सीमा सुरक्षा के साथ-साथ दुश्मनों को निशाना बनाने में सक्षम है। इसका वजन 11 किलोग्राम है और यह तीन किलोग्राम तक भार उठा सकता है। यह ड्रोन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगभग दो घंटे तक उड़ान भर सकता है।
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कीबोर्ड से बना दिया गमला, चिप से की-चेन
गुरुग्राम के मानेसर से जुड़ी कंपनी थ्रीआर जीरो वेस्ट ने ई-वेस्ट से बनाए गए उत्पादों से लोगों का ध्यान आकर्षित किया। कंपनी के कृष्ण कुमार ने बताया कि मदरबोर्ड और चिप के जरिये की-चेन, गुल्लक, कीबोर्ड से गमले और मल्टीलेयर चिप्स की पैकिंग से पेन स्टैंड व चेयर जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य ई-वेस्ट को रीसाइकिल और अपसाइकिल कर उपयोगी वस्तुओं में बदलना है।
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सोलर डिहाइड्रेटर से किसानों को लाभ
आईआईटी में इनक्यूबेटेड स्टार्टअप भोजपत्ता ने किसानों के लिए सोलर डिहाइड्रेटर विकसित किया है। इसकी मदद से मछली को आठ घंटे में, केला, चुकंदर और प्याज को दो दिनों में सुखाया जा सकता है। इससे उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ती है और उन्हें अधिक मूल्य पर बेचा जा सकता है। स्टार्टअप के संचालक नीतीश कुमार के अनुसार, अब तक 250 से अधिक किसानों को यह डिहाइड्रेटर उपलब्ध कराया जा चुका है। इसकी कीमत 12,000 रुपये से लेकर 10 लाख तक है। छोटे किसानों के लिए पांच किलोग्राम क्षमता वाला मॉडल उपलब्ध है, जबकि एक क्विंटल क्षमता वाला डिहाइड्रेटर लगभग 90,000 रुपये में मिलता है। इस तकनीक से किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।