:मैनपुरी अंडरपास में भरा पानी।
- फोटो : मृतक नैतिक। स्रोत: परिजन
इटावा। शहर में जलभराव से निजात के लिए 18 नालों सहित अन्य व्यवस्थाओं पर 20 करोड़ और वेतन पर लगभग 19 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च की गई। बारिश होते ही हकीकत सामने आ गई। आधा शहर जलभराव की समस्या से जूझता नजर आया। बारिश के बाद नगर पालिका के 39 करोड़ के इंतजाम पानी में डूबते नजर आए। बुधवार रात करीब एक बजे शुरू हुई बारिश सुबह पांच बजे तक चलती रही। इसके साथ ही गुरुवार शाम तीन बजे शुरू हुई बारिश देर शाम तक चलती रही। इससे एक ओर लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर शहर में जलभराव ने लोगों को परेशानियों में जरूर डाल दिया।
शहर की लगभग पांच लाख आबादी में नगर पालिका के 40 वार्ड है। इन वार्डों में जलभराव की निकासी के लिए शहर में इस साल 18 छोटे-बड़े नाले बनवाए जाने थे। इनपर लगभग 20 करोड़ की धनराशि भी खर्च की गई, लेकिन एक साल होने पर भी अधिकांश नालों का निर्माण नहीं हो सका। नतीजन मोहल्लों में जलभराव शुरू हो गया।
इसके साथ ही वार्डों की सफाई करने की जिम्मेदारी पालिका के स्थाई, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के कंधे पर है। इसके लिए 117 स्थाई, 116 संविदा और 875 सफाई कर्मचारी आउटसोर्सिंग के तैनात हैं। हर महीने सफाई कर्मचारियों पर लगभग 1.63 करोड़ खर्च किया जाता है। एक साल में इन कर्मचारियों की ओर से इन लगभग 19 करोड़ रुपये वेतन के रूप में लिया गया, लेकिन इन्होंने हकीकत की बजाए सिर्फ कागजों में सफाई की।
शहर में फिर से जलभराव शुरू हो गया। बीते मई माह में ही डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल की ओर से नगर पालिका को शहर के नालों की सफाई 15 मई तक करवाने के निर्देश दिए गए थे। पालिका का दावा था इस बार सफाई का ठेका न उठाकर अपने कर्मचारियों से ही शहर के 11 बड़े व 66 छोटे नालों की सफाई कराई गई है। बुधवार रात और फिर गुरुवार शाम को हुई तेज बारिश ने पूरे शहर के कई मोहल्लों को जलमग्न कर दिया। नाले-नांलियों की सही ढंग से सफाई न होने पर मुख्य बाजार सहित सड़कों में बरसाती पानी से सड़क व गली लबालब हो गईं।