हर महीने 10 किलोवाट की बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। यदि वह अपने यहां एपीएफसी (ऑटोमैटिक पॉवर फैक्टर करेक्टर) सिस्टम लगवाते हैं, तो उनके बिजली बिल में हर महीने 15 से 25 प्रतिशत की बचत होगी। साथ ही लाइन लॉस में भी कमी आएगी।
राज्य स्तर पर शुरू किए गए ऊर्जा बचत अभियान के तहत शासन ने नेडा (पारंपरिक ऊर्जा स्रोत विभाग) को एजेंसी नामित किया है। एपीएफसी सिस्टम लगवाने के लिए शासन स्तर से अभियान चलाया जा रहा है।
एपीएफसी सिस्टम उसी उपभोक्ता के लिए जरूरी होता है, जिसके यहां पावर फैक्टर का लेवल प्वाइंट 09 से कम होता है। इसकी जानकारी उपभोक्ता को बिजली के बिल से ही पता चल जाती है। बिल के दाहिनी तरफ जहां पर बिल पीरिएड लिखा होता है, उसी के नीचे पावर फैक्टर की रीडिंग लिखी होती है।
नेडा केे परियोजना अधिकारी अतुल जैन ने बताया कि बड़े संस्थानों, औद्योगिक इकाइयों में यह सिस्टम लगने से ज्यादा बिल आने की दिक्कत दूर हो जाएगी। सरकारी भवनों में यह अभियान के तहत लगाया जा रहा है। अधिक बिजली खपत करने वाला कोई भी उपभोक्ता इसे लगवा सकता है।
एपीएफसी सिस्टम एक तरह का उपकरण होता है, इसे मीटर में फिट किया जाता है। यदि 33 किलोवाट तक कनेक्शन है, तो इसे ट्रांसफार्मर के पास लगाया जाता है।
क्या होता है पॉवर फैक्टर
10 किलोवाट या उससे अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति दो तरह से की जाती है। एक केवीएच (किलो वोल्ट ऑवर) और दूसरा केडब्लूएच (किलो वॉट ऑवर)। इन दोनों के जरिए बिजली आपूर्ति में जब अंतर आ जाता है, तो बिजली की पॉवर में कमी आ जाती है।
इससे बिजली का नुकसान भी होता है, और खपत भी ज्यादा होती है। इसी कमी को पॉवर फैक्टर कहते हैं। इस समस्या को अक्सर उपभोक्ता नजर अंदाज करते रहते हैं। उदाहरण के तौर पर एचबीटीआई में इस बार पॉवर फैक्टर की कमी से 70 हजार यूनिट अधिक बिजली की खपत हुई है। एचबीटीआई का पॉवर फैक्टर प्वाइंट 0761 है।
पांच सरकारी भवनों में लगेगा सिस्टम
शासन की योजना के अनुसार सभी जनपदों के कम से कम पांच सरकारी भवनों में एपीएफसी सिस्टम लगाया जाना जरूरी। कानपुर में एचबीटीआई, सेल्सटैक्स विभाग भवन, कानपुर विश्वविद्यालय, जिला जज कोर्ट भवन, दलहन तिलहन संस्थान को इसके लिए चुना गया है। जांच में पाया गया है कि इन सभी के बिजली बिल के पावर फैक्टर में कमी पाई गई है।
2000 रुपये खर्च होंगे एक किलोवाट पर
एपीएफसी सिस्टम लगाने के लिए एक किलोवाट की बिजली खपत पर दो हजार रुपये खर्च आएगा। जिन उपभोक्ताओं को इसे लगाना है, वे इसके लिए नेडा (पारंपरिक ऊर्जा स्रोत विभाग) से संपर्क कर सकते हैं। नेडा कार्यालय विकास भवन में स्थित है।