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Kanpur News: तीन अफसरों समेत चार की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

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कानपुर। यूपीएसआईडीसी की गाजियाबाद में ट्रोनिका सिटी परियोजना में 4.50 करोड़ रुपये के राजस्व चोरी मामले में गाजियाबाद के तत्कालीन परियोजना अधिकारी संतोष कुमार, तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक लखनऊ राजेश कुमार चौहान, तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक गौतमबुद्ध नगर रामबोध मौर्य और लिपिक शब्बीर अहमद की अग्रिम जमानत अर्जी अपर जिला जज प्रथम सुदामा प्रसाद ने खारिज कर दी है।
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यूपीएसआईडीसी द्वारा गाजियाबाद में ट्रोनिका सिटी के लिए एक एमओयू तैयार किया गया था। यूपीएसआईडीसी के निदेशक मंडल के ललित श्रीवास्तव और तत्कालीन महाप्रबंधक यशपाल सिंह ने 87.10 एकड़ अविकसित जमीन को 397 रुपये प्रति वर्गगज की दर से डेवलपर को देने के लिए तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक प्रदीप कुमार को वर्ष 1994 में एमओयू तैयार करने के निर्देश दिए थे। प्रदीप ने एमओयू तैयार कर ट्रोनिका सिटी गाजियाबाद के तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक गौतमबुद्ध नगर निवासी रामबोध मौर्य को भेज दिया। रामबोध ने जुलाई 1997 में मेसर्स अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के साथ 50 रुपये के स्टांप पेपर पर एमओयू निष्पादित कर दिया।




जबकि इस जमीन से 13.96 एकड़ जमीन का कब्जा यूपीएसआईडीसी को जनवरी 1998 में राजस्व विभाग से मिला था। जुलाई 2003 में शासन के निर्देश पर एमओयू मामले में तीन करोड़ रुपये की स्टांप चोरी और डेढ़ करोड़ रुपये जुर्माना सहित साढ़े चार करोड़ रुपये की स्टांप चोरी का मामला खुला। फर्म को रुपये चुकाने के निर्देश दिए गए। वहीं ट्रोनिका सिटी के परियोजना अधिकारी गाजियाबाद के शास्त्री नगर निवासी संतोष कुमार और तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक लखनऊ के निगोहा निवासी राजेश कुमार चौहान द्वारा लिपिक हमीरपुर के मौदहा निवासी शब्बीर अहमद को लीज डीड को पंजीकृत कराने के लिए अधिकृत किया गया था। शब्बीर ही डीड तैयार कराता और रजिस्ट्रार के यहां ले जाता था। एडीजीसी प्रदीप कुमार साहू ने बताया कि मामले की सीबीसीआईडी जांच हुई थी।
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यशपाल सिंह, प्रदीप कुमार, सहायक मैनेजर अनूप कुमार श्रीवास्तव व रामबोध मौर्या द्वारा पद का दुरुपयोग करते हुए मेसर्स अंसल के मालिक दीपक अंसल और मैनेजर सुभाष चंद्र वाधवा के साथ षडय़ंत्र कर एमओयू का पंजीकरण न कराकर धोखाधड़ी करने के मामले का खुलासा हुआ। इंस्पेक्टर बृजेंद्र कुमार सिंह ने 2 जनवरी 2019 को सभी के खिलाफ कल्याणपुर थाने में धोखाधड़ी व सरकार को 4.50 करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति पहुंचाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले में प्रदीप कुमार और यशपाल सिंह को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। संतोष कुमार, राजेश कुमार चौहान, शब्बीर अहमद और रामबोध मौर्य ने अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी लेकिन कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए चारों की अर्जी खारिज कर दी।
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