पति और देवर की दर्दनाक मौत मैं आज भी नहीं भूल पाई हूं। जिस तरह दंगाइयों ने मेरी आंखों के सामने दोनों की लाठी-डंडों और सरिया से पीट-पीटकर मार डाला था, वह दर्द मैं आज भी महसूस करती हूं। दंगाइयों की भीड़ के आगे मैं और मेरा परिवार असहाय था। हम लोग कुछ नहीं कर पाए थे।
सिख विरोधी दंगे में अपनों को खोने का दुखड़ा पीड़िता ने शनिवार को एसआईटी के सामने सुनाया। एसआईटी ने पंजाब के मोहाली में पीड़िता के घर जाकर बयान दर्ज किए हैं। कल्याणपुर के शारदानगर में हुकुम सिंह का परिवार रहता था। 1984 के दंगों में हुकुम सिंह के बेटों भगत सिंह व हरबंश सिंह की हत्या हो गई थी।