कानपुर देहात। जनपद में सभी 27 पशु चिकित्सालयों में एंटी रैबीज का टीका नहीं है। इसके कारण पालतू मवेशियों का टीकाकरण प्रभावित है। आवारा कुत्ते आदि के काटने पर पशुपालकों को मजबूरी में मेडिकल स्टोर से महंगा टीका खरीदना पड़ रहा है।
जनपद में करीब छह लाख पशु हैं। इनके स्वास्थ्य देखभाल की जिम्मेदारी 10 ब्लॉक के 27 पशु चिकित्सालय पर हैं। छह तहसील मुख्यालयों के अलावा प्रमुख नगर रूरा, झींझक, राजपुर, अमरौधा आदि में पशुपालक मवेशियों के इलाज के लिए अस्पताल में पहुंचते हैं। विभाग मवेशियों के टीकाकरण के प्रति संजीदगी का दावा कर रहा लेकिन हकीकत उलट है। हालात ये हैं कि किसी पशु चिकित्सालय में एंटी रैबीज का टीका उपलब्ध नहीं है। पशुपालक पशु चिकित्सालयों के पालतू जानवरों को एंटी रैबीज टीका लगवाने के लिए पहुंचते हैं तो टीका उपलब्ध न होने की जानकारी दी जाती है। कई पशुपालक मेडिकल स्टोर से महंगे टीके खरीदकर पालतू जानवरों के लगवाने को मजबूर हैं। वहीं, कई बार लोग जानवर को बिना टीका लगवाए ही लौट रहे हैं।
राजपुर के खासबरा गांव में आवारा कुत्तों ने बकरियों पर हमला कर दिया था। चार बकरियां घायल हो गई। पशुपालक बकरियां लेकर राजपुर पशु चिकित्सालय पहुंचे वहां पशुचिकित्सक डॉ. गौरव कुमार ने एंटी रैबीज टीका उपलब्ध नहीं होने की बात कही। इसपर पशुपालक को मेडिकल स्टोर से टीका खरीदकर बकरियों को लगवाना पड़ा। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुबोध कुमार बर्नवाल ने बताया कि बीते साल एंटी रैबीज टीके मिले थे। इस साल एंटी रैबीज टीके उपलब्ध नहीं हो सके हैं। निदेशालय को मांग पत्र भेजा गया है। जल्द एंटी रैबीज टीके उपलब्ध होने की उम्मीद है।
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अपने पैसै खर्च कर लगवा रहे टीका
फोटो-5-प्रेमनरायन कल्लनपुर
पशुपालन विभाग के पास एंटी रैबीज टीके उपलब्ध नहीं हैं। लोगों को अपने पैसे खर्च करके टीकाकरण करवाना पड़ रहा है। क्षेत्र में लावारिस कुत्ते पागल हो रहे हैं। गत दिनों सट्टी क्षेत्र में तीन पशुओं की लावारिस कुत्ते के काटने से मौत हो चुकी है। - प्रेमनरायन कल्लनपुर
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फोटो-6- रामनरेश जाहगीरपुर
बारिश में हिसंक हुए आवारा कुत्ते पशुओं को निशाना बना रहे हैं। दो दिन पहले खेत में बकरियों को चराते कुत्तों के झुंड ने बछिया को काट लिया था। शाहजहांपुर के पशु चिकित्सालय में एंट्री रैबीज नहीं मिलने पर मेडिकल स्टोर से एंटी रैबीज इंजेक्शन खरीदकर बछिया को लगवाना पड़ा।-रामनरेश जाहगीरपुर
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150 में खरीदनी पड़ रही एंट्री रैबीज वैक्सीन
पशु चिकित्सालय में पशुओं को लगाई जाने वाली एंटी रैबीज वैक्सीन का स्टाक नहीं है। लोग निजी स्टोर से चार गुना अधिक दाम पर वैक्सीन खरीदने को मजबूर हैं। अकबरपुर के पशुपालक वीरेंद्र यादव, मलखान सिंह आदि ने बताया कि घरों में पालतू जानवर होना आम बात है। ऐसे में स्वयं और जानवर के स्वास्थ्य को लेकर सजगता भी जरूरी है। पालतू जानवरों को साल में एक बार एंटी रैबीज वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। इससे कुत्ते, बिल्ली के काटने पर रैबीज का खतरा कम हो जाता है। सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन आसानी से लग जाती है लेकिन इन दिनों जिले के सरकारी पशु चिकित्सालयों में एंट्री रैबीज वैक्सीन नहीं होने से लोगों को मेडिकल स्टोर से 150 रुपये एंटी रैबीज खरीदनी पड़ रही है।