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बिकरूकांड: अब खुशी के मामले की बाल न्यायालय में होगी सुनवाई

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कानपुर देहात। बिकरू कांड में आरोपी खुशी के मामले की सुनवाई अब माती स्थित बाल न्यायालय में होगी। किशोर न्याय बोर्ड ने खुशी से बातचीत के बाद यह माना है कि उसे अपराध की समझ थी। वह हाईस्कूल तक शिक्षित है। वह अपराध के परिणाम को भी समझती थी। मामले की सुनवाई के लिए पत्रावली बाल न्यायालय स्थानांतरित कर दी गई है। वहीं खुशी के अधिवक्ता ने इस आदेश के विरुद्ध बाल न्यायालय में अपील करने की बात कही है।
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दो जुलाई को बिकरू गांव में कुख्यात विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस पर गोलियां चलाई गई थीं। इसमें सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। मामले में विकास के करीबी अमर दुबे की कथित पत्नी खुशी को भी पुलिस ने आरोपी बनाया है। उस पर वह सभी धाराएं लगाई गई हैं जो विकास समेत उसके साथियों पर लगी हैं। किशोर न्याय बोर्ड ने खुशी के उम्र का निर्धारण कराया तो घटना के दिन वह 16 साल, दस महीने, 12 दिन की थी। इसके बाद मामले की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में चल रही थी। खुशी को माती जेल से बाराबंकी बालिका संरक्षण गृह भेजा गया था। वहीं 17 दिसंबर को सुनवाई के दौरान बोर्ड ने उसकी मानसिक स्थित के प्रारंभिक निर्धारण के लिए बातचीत की थी। इसके बाद किशोर न्याय बोर्ड यह मान रहा है कि खुशी अपराध को समझने की स्थिति में थी। उसे पूरी तरह से समझ है। उसके कृत्य को नासमझी में किया गया कार्य नहीं कहा जा सकता है। वह अपराध को पूरी तरह से समझने की योग्यता भी रखती थी। किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट साक्षी गर्ग ने मामले की सुनवाई के लिए पत्रावली बाल न्यायालय स्थानांतरित कर दिया है। खुशी के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि किशोर न्याय बोर्ड के निर्णय के विरुद्ध बाल न्यायालय में अपील करेंगे। साथ ही खुशी की मनोवैज्ञानिक परीक्षण पैनल व विशेषज्ञों से कराने की मांग की जाएगी।
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