फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कानपुर: बेसहारा पशु-पक्षियों का सहारा बनेंगे पशु प्रेमी, भोजन-पानी, दवा का करेेंगे इंतजाम, अमर उजाला की पहल

Fri, 19 Mar 2021 01:23 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
बेसहारा जानवरों का सहारा बनने के लिए एकत्र हुए पशु प्रेमी - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
कानपुर में बेसहारा पशु-पक्षियों के संरक्षण, इलाज और भोजन के लिए शहर के पशु प्रेमियों ने एकजुटता दिखाई है। ‘अमर उजाला’ की पहल पर पहली बार एकत्रित हुए पशु प्रेमियों ने पशु क्रूरता के खिलाफ आवाज उठाने का संकल्प लिया। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाएंगे।
विज्ञापन


इन पशु प्रेमियों ने अपना एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है, जिसकी मदद से इन्हें बीमार, भूख-प्यास से कराह रहे पशु पक्षियों की जानकारी मिलेगी और उन्हें तुरंत मदद दी जा सकेगी। अमर उजाला कार्यालय, फजलगंज में गुरुवार को आयोजित बैठक में पशु चिकित्सा विभाग और दवा व्यापारियों ने भी हर संभव मदद करने की बात कही।

पशु चिकित्सा विभाग पशु प्रेमियों को प्रशिक्षित करेगा, ताकि वे घायल पशुओं का इलाज कर सकें। दवा विक्रेता इन्हें न्यूनतम दाम पर दवाएं उपलब्ध कराएंगे। बैठक में पीएफए की अध्यक्ष अर्चना त्रिपाठी, नगर निगम के उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके निरंजन, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल चंद्रा, संजय मेहरोत्रा, नंदकिशोर ओझा, प्रकाश कुमार, मनहर कांत, तरनजीत सिंह, कमल कुमार यादव, आशुतोष त्रिपाठी, हर्षित अवस्थी, अमन शुक्ला, लक्ष्मी माथुर, सौम्या सिंह, कनिका मिश्रा, अनिल मिश्रा, आकृति राजपाल, नयनप्रीत कौर, ज्ञानेंद्र अवस्थी, सुशील पांडेय, तान्या अवस्थी, प्रखर वाजपेयी, हिमांशु दीक्षित, सचिन गौड़, प्रखर तिवारी, सौम्या सिंह, साश्वत अवस्थी, विवेक तिवारी, एनके ओझा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन


क्या बोले पशु प्रेमी
पशुओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले यूं तो शहर में बहुत से लोग हैं। ये सभी लोग अलग-अलग अपने स्तर पर कार्य करते हैं और अनेकों समस्याओं से रोज जूझते हैं। इन सभी को एक मंच पर लाने का बहुत समय से प्रयत्न कर रहा था, जिसे अमर उजाला ने पूरा कर दिया है। 
गौरव बाजपेई, गौरैया संरक्षण अभियान

पशुओं के अधिकारों की जानकारी हर थाने में लिखित में होनी चाहिए। ताकि उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ने वालों को संबंल मिल सके। साथ ही पुलिस को भी इस कार्य में सहभागिता दर्ज करानी चाहिए।तमन्ना सेठी, स्पेशल ट्रीटमेंट फॉर एनिमल्स एंड रेपटाइल्स सोसाइटी

बेजुबानों पर हो रही क्रूरता के लिए हम सभी पशु प्रेमियों को एक साथ आना होगा। क्योंकि हम सभी का उद्देश्य मात्र इन बेजुबानों को बेहतर जीवन देना है। मेरा सभी पशु प्रेमियों से निवेदन है कि अमर उजाला द्वारा चलाई जा रही मुहिम में एक-दूसरे के सहयोगी बनें और इन जीवों के लिए एक बेहतर कल बनाएं। 
मयंक त्रिपाठी, उम्मीद एक किरण

बेजुबान जीवों पर दया का भाव रखें और मांसाहार को त्यागने का प्रयास करें। क्योंकि आपकी जीभ की तृप्ति के लिए किसी जानवर की हत्या की जाती है। सड़कों पर वाहन चलाते वक्त अपनी गति नियंत्रित रखें, क्योंकि यह जानवर जख्मी होने के बाद अक्सर अस्पताल तक नहीं जा पाते और न ही इन्हें कोई मेडिकल सहायता मिल पाती है। 
शुभांगी, रिस्पेक्ट द वॉइसलेस
 
विज्ञापन

बेसहारा जानवरों का सहारा बनने के लिए एकत्र हुए पशु प्रेमी - फोटो : amar ujala
पशु क्रूरता से संबंधित कानूनों की जानकारी ज्यादातर लोगों को नहीं है, जिसके कारण वे पशुओं पर क्रूरता करते हैं। पशुओं के संरक्षण के लिए लोगों के साथ ही पुलिस को भी जागरूक करने की जरूरत है। जो पशु जहां पैदा हुआ है, उसे वहां से हटाया नहीं जा सकता। पशुओं को मारना, पीटना, घायल करना अपराध है। इसमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है। लंगूरों को हायर करना और उनसे बंदरों को पकड़वाना भी अपराध है।
अर्चना त्रिपाठी, अध्यक्ष, पीपल्स फॉर एनीमल (पीएफए) 

नगर निगम की तरफ से बेसहारा कुत्तों (स्ट्रीट डॉग) की नसबंदी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। फूलबाग स्थित एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर में रोज 30-40 स्ट्रीट डॉग की नसबंदी की जा रही है। तीन दिन बाद उन्हें वहीं छोड़ दिया जाता है। यदि किसी मोहल्ले में स्ट्रीट डॉग ज्यादा हैं और उनकी नसबंदी कराना चाहता हैं तो वहां के लोग नगर आयुक्त को प्रार्थनापत्र दे सकते हैं। ऐसे कुत्तों को एबीसी सेंटर ले जाकर नि:शुल्क नसबंदी भी करा सकते हैं।
डॉ. आरके निरंजन, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, नगर निगम

दुर्घटना में किसी पशु के घायल होने की सूचना पर पशु चिकित्सक जाता है। रायपुरवा पशु चिकित्सालय में वही पशु भर्ती करते हैं, जो बीमारी या फ्रैक्चर की वजह से खड़े नहीं हो सकते। उन्हें बचाने का प्रयास करते हैं। संसाधनों बजट की कमी से रीढ़ की हड्डी आदि के ऑपरेशन नहीं हो पाते। पारगो, डिस्टेंपर आदि बीमारियों के इलाज के लिए अलग अस्पताल की कोशिश की जा रही है। 
डॉ. राहुल चंद्रा, पशु चिकित्सक, रायपुरवा अस्पताल

पशु प्रेमियों को दुर्गा दवा घर सहित कुछ अन्य दवाखानों से वेटनरी की दवाएं खरीद दाम पर मिलेंगी। एलोपैथिक दवाएं भी कम से कम कीमत पर दी जाएंगी। बेसहारा पशुओं के लिए पशु आहार निर्माताओं से भी सहयोग लिया जाएगा।

जान लो कानून 
- पशुओं को खाना खिलाने से रोकना भी अपराध
- पशु क्रूरता अधिनियम-1950 के तहत पशुओं, पक्षियों के साथ किसी भी तरह की क्रूरता अपराध की श्रेणी में आती है। इस अधिनियम की धारा 38 के तहत कोई पशु या पक्षी बेच नहीं सकता। यदि बेचना भी है तो इसके लिए सेंट्रल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया का प्रमाणपत्र जरूरी है।
- एबीसी अधिनियम-2001 के अंतर्गत कुत्ते को जन्म स्थान से हटाया नहीं जा सकता।
- किसी भी पशु को घायल करना आईपीसी की धारा 428 के तहत गैर जमानती अपराध है। इसमें पांच साल की सजा का प्रावधान है। इसी तरह पशु की हत्या करने पर आईपीसी की धारा 429 के तहत सात साल तक की सजा हो सकती है।
- वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत किसी भी वन्य जीव को न कोई बेच सकता है और न ही कोई पाल सकता है।
- भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के स्पष्ट आदेश हैं कि जो पशु जहां जन्मा है, उसे वहां से हटाया नहीं जा सकता है। कोई भी कुत्ता या अन्य किसी बेसहारा पशु को खिलाता है तो उन्हें ऐसा करने से कोई रोक नहीं सकता।
- पशुओं की देखभाल करने वालों को ऐसा करने से रोकने या प्रताड़ित करने पर आईपीसी की धारा 503, 504, 506 के तहत एफआईआर दर्ज हो सकती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें