कलक्ट्रेट परिसर में एकत्र अधिवक्ता।
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कानपुर देहात। एडवोकेट संशोधन बिल के खिलाफ बार काउंसिल के आवाहन पर शुक्रवार को कचहरी के अधिवक्ता विरोध दिवस मनाते हुए न्यायिक कार्य से विरत रहे। वहीं, सभी अधिवक्ता संगठनों ने केंद्र सरकार द्वारा संशोधन बिल को वापस लेने की मांग करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया।
केंद्र सरकार की ओर से तैयार किए गए एडवोकेट एक्ट संशोधन बिल से अधिवक्ताओं में आक्रोश है। संशोधन बिल के खिलाफ बार काउंसिल ने शुक्रवार को पूरे प्रदेश में विरोध दिवस मनाने के साथ ही 25 फरवरी को सभी अधिवक्ताओं को न्यायिक कार्य से विरत रहने के निर्देश दिए हैं। इसपर कचहरी के सभी अधिवक्ता संगठनों ने बिल के खिलाफ शुक्रवार को न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए अपना विरोध जताते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि भारत सरकार एडवोकेट संशोधन बिल लाकर वकीलों की स्वतंत्रता को दबा रही है। केंद्र सरकार लोकतंत्र का गला घोट रही है, जबकि वकीलों के बिना न्याय प्रणाली अधूरी है। अधिवक्ता मांग रहे थे एडवोकेट प्रोटक्शन एक्ट और सरकार एडवोकेट संशोधन बिल लाकर वकीलों को चुप करा रही है जो संभव नहीं है।
एकीकृत बार एसोसिएशन के महामंत्री देवेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि केंद्र सरकार ने अगर अधिवक्ताओं की मांगे नहीं मानी तो बार 25 फरवरी को अधिवक्ता व्यापक स्तर अपना विरोध प्रदर्शन करेंगे और भारत सरकार द्वारा थोपे जा रहे एडवोकेट संशोधन बिल का घोर विरोध करेंगे। इस मौके पर एकीकृत बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजपाल यादव, विजय मिश्रा, विनोद यादव, सुबोध नारायण त्रिपाठी, रमेश चंद सिंह गौर, घनश्याम सिंह राठौर, धर्मेंद्र सिंह यादव, ज्योति सिंह राणा आदि मौजूद रहे।