गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की कवायद सिर्फ कागजों पर चल रही है। एनजीटी के निर्देश पर गंगा प्रदूषण जांच के लिए बनाई गई हाई पावर कमेटी की जांच से यह खुलासा हुआ है कि पहले से ज्यादा प्रदूषित कचरा गंगा में गिर रहा है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से ओवर फ्लो होकर 200 एमएलडी से अधिक गंदा पानी सीधे गंगा में जा रहा है। शुक्रवार को कमेटी के अधिकारियों ने दौरा करके यह कड़वी सच्चाई देखी। पानी के सैंपल लिए और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई।
सुबह 11 बजे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम वाजिदपुर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंची। टीम ने प्लांट में सीवर और टेनरी से सीधे आने वाले पानी और ट्रीटमेंट के बाद निकलने वाले पानी का सैंपल भरा।
साथ ही ट्रीटमेंट प्रक्रिया को भी देखा। टीम के विशेषज्ञों ने ट्रीटमेंट प्लांट के फाइनल टैंक से निकल रहे पानी में सल्फाइट (हानिकारक केमिकल) की मात्रा अधिक निकलने पर सवाल उठाया। कमेटी के प्रमुख आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर एए काजमी ने हानिकारक तत्व मिलने पर नाराजगी जाहिर की। बोले, इस तरह के केमिकल पर रोक लगाना जरूरी है।
एयरफोर्स नाले के संबंध में जब पूछा गया तो जल निगम अधिकारी एके गुप्ता नेे बताया कि इससे बारिश का पानी और प्लांट से ओवरफ्लो होने वाला पानी गंगा में जाता है। पानी का सैंपल लेने के बाद अधिकारियों ने कहा कि सीवेज और टेनरी से निकलने वाले पानी में कोई खास अंतर नहीं दिख रहा है। दोनों का रंग एक ही जैसा है।
इस दौरान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी एबी अकोलकर, जोनल इंचार्ज पीके गर्ग यूपी प्रदूषण नियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता टीयू खान, जल निगम प्रदूषण नियंत्रण इकाई के जीएम एके गुप्ता, प्रोजेक्ट मैनेजर विनेश कुमार व अजय कनौजिया मौजूद रहे।