रोती बिलखती पत्नी शारुन, साथ में बेटा।
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कानपुर। नई दिल्ली एम्स में इलाज कराने जा रहे कैंसर पीड़ित बुजुर्ग की बुधवार को सीमांचल एक्सप्रेस में तबीयत बिगड़ गई। पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (मुगलसराय) से सेंट्रल स्टेशन तक बिना इलाज के ही वह 316 किलोमीटर का सफर तड़पते हुए करते रहे। सेंट्रल स्टेशन पर जब डॉक्टर उनके पास पहुंचे तो काफी देर हो चुकी थी और उनकी सांसें थम चुकी थीं।
बिहार के अररिया निवासी 70 साल के मंजर आलम करीब दो साल से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। फायदा न मिलने पर पत्नी शारुन निशां और बेटा रिजानू बुधवार को उन्हें लेकर दिल्ली एम्स जा रहे थे। तीनों लोग जोगबनी से आनंद विहार जाने वाली 12487 सीमांचल एक्सप्रेस के एस-5 कोच की सीट नंबर-74 पर थे। मुगलसराय जंक्शन से ट्रेन आगे बढ़ी तो मंजर की तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें पानी और पास में रखी दवाएं दीं, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। इस बीच ट्रेन प्रयागराज स्टेशन पर रुकी तो मंजर के बेटे ने कुछ अन्य यात्रियों के साथ प्लेटफार्म पर जाकर पूछताछ की, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली, तभी ट्रेन चल दी। कानपुर तक करीब पांच घंटे तक मंजर आलम तड़पते रहे।
दोपहर करीब 2:02 बजे ट्रेन सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-1 पर पहुंची तो मंजर के बेटे व अन्य यात्रियों ने टीटी को जानकारी दी। उस वक्त मंजर बेहोश हो गए थे। टीटी की सूचना पर प्लेटफार्म पर ड्यूटी पर तैनात डॉ. रंजीत कोच में पहुंचे और 2:35 बजे जांच करने के बाद उन्होंने मंजर को मृत घोषित कर दिया। इस दौरान सीमांचल एक्सप्रेस करीब 45 मिनट खड़ी रही और दोपहर 2:44 बजे रवाना हुई।
उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि मुगलसराय से ट्रेन चलने के बाद यात्री के साथ माैजूद परिजनों ने कहीं भी उसके बीमार होने की जानकारी नहीं दी। ट्रेन दोपहर 2:02 बजे सेंट्रल स्टेशन पर पहुंची तो परिजनों ने बुजुर्ग के बीमार होने की जानकारी दी। जिस पर 2:22 बजे डाॅक्टर कोच में पहुंचे और जांच करने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।