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कानपुर के साथ आज रिश्तों की सिल्वर जुबली मना रहा ‘अमर उजाला’

Wed, 01 Mar 2017 09:10 AM IST
विजय त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर अमर उजाला की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर सजा फजलगंज स्थित कार्यालय - फोटो : रविन्दर सिंह भाटिया
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पत्रकार शिरोमणि गणेश शंकर विद्यार्थी और पंडित प्रताप नारायण मिश्र के इस ऐतिहासिक शहर कानपुर में अमर उजाला की मौजूदगी के आज 25 साल पूरे हो गए। इस शानदार सफर में आप लाखों पाठक पूरे स्नेह से हमारे सहयात्री बने। हम उस वक्त आपके बीच आए जब आपको हमारी सबसे ज्यादा जरूरत थी।
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आप एक ऐसे संपूर्ण अखबार के तलबगार थे जो किसी परिवार के सभी सदस्यों, सभी पीढ़ियों की जरूरत बन सके। ये चुनौती हमने स्वीकारी और आपकी सोच का अखबार निकालकर आपका भरोसा जीता। इसी की बदौलत कानपुर शहर और आसपास के 14 जिलों में अमर उजाला का पाठक परिवार दिन दूना-रात चौगुना बढ़ रहा है।

हमसे नए-नए परिवार तेजी से जुड़ते जा रहे हैं। अमर उजाला की लांचिंग यानी पहली मार्च 1992 को सत्य के जिस मार्ग पर हमने कदम रखे, आज हम उस पर पहले से कहीं ज्यादा अटल और अडिग हैं। निर्भीकता, निष्पक्षता, निडरता...हमारे ये औजार हमेशा बने रहेंगे।
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25 साल में कानपुर शहर काफी-कुछ बदला। हर बदलते वक्त में हम आपके साथ थे-गंगा मइया की तरह। हमने आपके साथ हातों और कालोनियों से निकलकर ऊंचे-ऊचे अपार्टमेंटों तक का सफर तय किया। गुमटियों से शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तक गए, बदवक्त हुए दंगे-फसादों से हमारे दिल में भी घाव हुए, देश-विदेश में कानपुर का नाम हुआ तो हमारी छाती भी चौड़ी हुई।

हमारी बेटियों ने आकाश छुआ तो खुशी के मारे हमारी आंखें भी छलछला गईं। आखिर हम दिल से जुड़े हैं। हम कानपुर के दिल में बसते हैं और कानपुर हमारे दिल में।  इस दौरान आपसे बना हमारा रिश्ता सिर्फ खबरों तक ही सीमित नहीं रहा। इसे और विविध और बहुरंगी किया अमर उजाला फाउंडेशन के माध्यम से सामाजिक सरोकारों के हमारे कामों ने।  हमारा आगे का सफर और शानदार हो, आपसे रिश्ता और मजबूत हो.....ऐसी कामना है।
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