इसकी पुष्टि यूपी बोर्ड से हुई। इसके बावजूद पासपोर्ट अफसर ने सभी प्रक्रिया का सत्यापन कर फाइल ओके कर दी। उसका पासपोर्ट भी बन गया। ये खेल करने वाले वही पासपोर्ट अफसर हैं, जो कर्नलगंज वाले केस में पुलिस की जांच की जद में आए हैं।
निचले स्तर पर लगी थी आपत्ति
पासपोर्ट सेवा केंद्र पर आवेदक को दो से तीन चरण की प्रक्रिया करनी होती है, जिसमें पहले टोकन लिया जाता है। उसके बाद दस्तावेजों का सत्यापन होता है। आखिर में पासपोर्ट अफसर फाइल पास करते हैं। संतोष के दस्तावेजों से पता चला कि उस दौरान सेवा केंद्र पर तैनात बाबू यादव ने मार्कशीट को लेकर आपत्ति लगाई थी। मगर बाद में ये फाइल पासपोर्ट अफसर शैलेंद्र सिन्हा के पास पहुंची थी, तो उन्होंने इसे नजरअंदाज कर फाइल पास कर दी थी। उसी आधार पर संतोष का पासपोर्ट बना।
सुलतानपुर निवासी मोकील अंसारी के पासपोर्ट संबंधी दस्तावेज भी पड़ताल के दौरान अमर उजाला के हाथ लगे हैं। मोकील ने जनता इंटर कॉलेज पचपेड़वा संतकबीर नगर की मार्कशीट लगाई है। इस मार्कशीट पर जिले का कोड नहीं है। ये मार्कशीट भी फर्जी है। इस फाइल को भी शैलेंद्र सिन्हा ने ही पास किया था। ये पासपोर्ट 7 सितंबर 2019 में कानपुर पासपोर्ट सेवा केंद्र से जारी किया गया था। इसी तरीके से कुशीनगर के महबूब ने भी फर्जी मार्कशीट लगाकर पासपोर्ट बनवाया है।
लंबे समय से चल रहा है फर्जीवाड़ा
2019 में तैनात पासपोर्ट अफसर वर्तमान में भी कानपुर पासपोर्ट सेवा केंद्र पर ही तैनात हैं। संतोष के पासपोर्ट मामले के खुलासे से साफ है कि ये खेल काफी समय से चलता आ रहा है। दोबारा जब अफसर की पोस्टिंग हुई तो फिर फर्जीवाड़ा शुरू हो गया। कर्नलगंज पुलिस जल्द ही अफसर से पूछताछ कर सकती है।
जिस तरह से फर्जी दस्तावेजों पर वैध पासपोर्ट बनवाने का खेल किया गया, वो सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ है। इस तरह से न जाने कितने अपराधियों ने पासपोर्ट बनवाए होंगे। सूत्रों के मुताबिक इस तरह के पासपोर्ट से लोग खाड़ी देश अधिक गए हैं। इसमें सुरक्षा एजेंसी भी जांच कर सकती है।
पुलिस ने पकड़ा था वसीम को
24 जनवरी को कर्नलगंज पुलिस ने बाबूपुरवा निवासी वसीम अली को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस ने खुलासा किया था कि वसीम लोगों के शैक्षणिक व अन्य दस्तावेज फर्जी तैयार कर उनके जरिये वैध पासपोर्ट बनवाता था। पुलिस ने जब तफ्तीश की तो इसमें पासपोर्ट अफसर का नाम सामने आया है। पुलिस छानबीन कर रही है। ये वही पासपोर्ट अफसर हैं, जिन्होंने 2019 में संतोष व मोकील अंसारी समेत कई और का फर्जी दस्तावेजों पर पासपोर्ट जारी किया है।