स्कूल से निकलकर कॅरियर बनाने की राह पर खड़ी छात्राओं को बेहतर भविष्य के लिए पहले से ही विचार करना होगा। वर्तमान में देश-दुनिया में आर्थिक परिदृश्य बदल रहा है। कारपोरेट कल्चर बढ़ रहा है। आर्थिक मामलों के कुशल जानकारों की मांग भी बढ़ी है। ऐसे में छात्राओं के लिए 12वीं के बाद कॉमर्स के क्षेत्र में कॅरियर बनाने की अपार संभावनाएं हैं। यह बात कॅरियर काउंसलर सीए प्रिया धींगरा व सीएस तन्वी सराफ ने 10वीं 11वीं व 12वीं की छात्राओं से कही।
अमर उजाला अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत कानपुुर के जूही परमपुरवा स्थित कैंब्रिज पब्लिक स्कूल में छात्राओं के लिए कॅरियर पर आधारित कार्यशाला का आयोजन किया गया था। यहां विश्व बैंक बर्रा स्थित कैंब्रिज कान्वेंट स्कूल की भी छात्राएं मौजूद रहीं। सीए प्रिया धींगरा ने छात्राओं को बताया कि एक चार्टर्ड एकाउंटेंट किसी कंपनी की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। 12वीं के बाद सीए की पढ़ाई करना बहुत आसान है। सीए संस्थान कानपुर में ही रजिस्ट्रेशन कराना होता है। पढ़ाई करने के लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं होती। शहर में ही अच्छी कोचिंग भी हैं। अब तो शहर में ही पांच से 10 लाख के सालाना पैकेज पर प्लेसमेंट भी होने लगा है। इसकी पढ़ाई पूरी करने में चार से पांच साल लगते हैं। इस पढ़ाई में बहुत अधिक पैसों की भी जरूरत नहीं पड़ती। पांच साल के कोर्स में महज 50,000 फीस है। जिसे तीन टुकड़ों में देना होता है।
सीएस तन्वी सराफ ने कंपनी सचिव के कोर्स के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीए की तरह ही सीएस की पढ़ाई में भी इतना ही खर्च आता है। एक सीएस के बगैर किसी कंपनी की कल्पना ही नहीं की जा सकती। कंपनी की नीतियों को निर्धारित करने का जिम्मा सीएस पर ही होता है। इसमें भी चार से पांच साल लगते हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद सीए या सीएस की अहमियत किसी डॉक्टर या इंजीनियर से कम नहीं होती। इसके बाद सभी महिलाओं का सम्मान करने की शपथ दिलाई गई। कार्यशाला में स्कूल के प्रबंधक दिनेश शुक्ल, निदेशक गौरव शुक्ला, नीलम शुक्ला, गरिमा चतुर्वेदी, अंजनी राजपूत, राइसा, श्रीकांत शर्मा व अजय द्विवेदी मौजूद रहे।
वक्ता बोलीं...
महिलाओं को आगे बढ़ाने का अमर उजाला का यह बहुत ही सराहनीय प्रयास है। इसे लगातार चलना चाहिए। इस तरह की कार्यशालाओं से छात्राओं को कॅरियर चुनने में मदद मिलती है।--
प्रिया धींगरा, चार्टर्ड एकाउंटेंट
महिलाओं को कॅरियर की राह में आगे बढ़ाना ही सबसे बड़ा सम्मान है। अमर उजाला के प्रयास से ऐसा संभव हो पा रहा है। अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स सराहनीय है।
--तन्वी सराफ, कंपनी सेक्रेटरी