कानपुर में अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत आयोजित संवाद में पत्र वितरकों की पत्नियों ने उनके संघर्ष की कहानी बयां की। बताया कि वर्षों से उनकी दिनचर्या कैसी है? आधी रात के बाद पति को सेंटर पर भेजना, फिर सुबह होते ही घर संभालने की जिम्मेदारी कैसे निभाती हैं। कई महिलाएं ऐसी भी रहीं, जो अपने पति और बेटी के साथ अखबार बांटने निकल पड़ती हैं। एक महिला पति और बेटे के गुजर जाने के बाद 70 वर्ष की उम्र में अखबार बांट रहीं हैं।
पैदल बांटती हूं 250 अखबार
18 साल से रोजाना 250 अखबार पैदल ही बांटती हूं। मेरी बेटी और पति भी अखबार बांटते हैं। लोगों को हैरानी होती है कि कैसे तेजी के साथ इतने अखबार बांट लेती हूं, लेकिन अब आदत हो गई। लोगों का भी खूब प्रोत्साहन मिलता है। उम्र बढ़ रही है तो सर्दी में थोड़ी दिक्कत होती है, फिर भी काम को एकाग्रता के साथ करतीं हूं। - शांति तिवारी, बर्रा सेंटर
सास करती हैं सपोर्ट
32 वर्षों से पति पेपर लगा रहे हैं, लेकिन कोई परेशानी नहीं होती, क्योंकि सास कृष्णा तिवारी सब संभाल लेती हैं। वह ही पति और ससुर को सुबह उठाती हैं और हमको न उठने के लिए कहती हैं। वह मेरा पूरा ख्याल रखती हैं। उनका कहना है कि इतने वर्षों में उनको भोर में उठने की आदत हो गई है। पति और ससुर को उठाने की जिम्मेदारी उनकी है। - लक्ष्मी तिवारी, सर्वोदय नगर
70 की उम्र में भी युवा जोश
मेरी उम्र करीब 70 साल है, लेकिन आज भी पेपर लगाती हूं। पति और बेटे के गुजरने के बाद पेपर लगाने का बीड़ा मैंने उठा लिया। 25 साल हो गए हैं लेकिन आज भी वह दम है जो बरसों पहले था। लाजमी है कि उम्र के साथ दिक्कतें आने लगी हैं, लेकिन जोश कम नहीं हुआ है।
- सरस्वती अवस्थी, कल्याणपुर सेंटर
आकांक्षा के सपनों को लगे छात्रवृत्ति के पंख
पिता प्रताप नारायण कई वर्षों से पत्र वितरक हैं। कुछ समय पहले उनको पैरों की नसों में दिक्कत आ गई थी, जिससे उनका चलना-फिरना बंद हो गया था। घर में तंगहाली थी। रोजमर्रा के खर्चे भी मुश्किल से निकलते थे। ऐसे में कॉलेज की फीस जमा करना पिता के लिए संभव नहीं था। 10वीं में 91 प्रतिशत और 12वीं में 86 प्रतिशत अंक हासिल किए। बीसीए की पढ़ाई के लिए फीस के पैसे नहीं थे। ऐसे में अमर उजाला की ओर से आयोजित होने वाली अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा उत्तीर्ण की। इससे मिलने वाले पैसों से खास मदद हो गई। इसके लिए अमर उजाला का दिल से धन्यवाद।
- आकांक्षा तिवारी, नौबस्ता
ये रहीं मौजूद
शांति दिवाकर, संतोष कुमारी, पूनम वर्मा, रामश्री, शीतल पाल, शुभि शुक्ला, रंजना चंदेल, निर्मला पाल, कांति शुक्ला, बबली साहू, अंजू गुप्ता, बबिता शुक्ला, अनीता पांडेय, उमा गुप्ता, पद्मा त्रिवेदी, सरोज वर्मा, पूजा अवस्थी, रोली, आकांक्षा पांडेय, रश्मि मिश्रा, राम जानकी कश्यप, शिखा गुप्ता, शीलम, श्वेता यादव, कहकशां, लक्ष्मी तिवारी, शिवानी, कृष्णा तिवारी, रचना सिंह, पूजा गुप्ता, सुधा तिवारी, सुलेखा वर्मा, शशि अवस्थी, सीमा तिवारी, गिरजेश तिवारी, सरस्वती अवस्थी, प्रियंका मिश्रा, रश्मि सिंह, अर्चना अवस्थी, रजनी गुप्ता, शिखा कुशवाहा, अंजलि तिवारी, आकांक्षा पांडेय, शिवानी मिश्रा, नेहा मिश्रा, पुष्पा पाल, रोशनी, अंजलि, सुलेखा, शालिनी, उमा वर्मा, रचना, कांति देवी, रितु चौरसिया, सुलेखा निषाद मौजूद रहीं।
स्त्री रोग विशेषज्ञ ने दिए हेल्थ टिप्स
कार्यक्रम के दौरान मेडिकल कॉलेज में स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. किरण पांडेय ने पत्र वितरकों की पत्नियों को स्वास्थ्य से संबंधित जानकारियां दीं। कहा कि डिलीवरी के वक्त खुद पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है। रेगुलर चेकअप, आयरन, कैल्शियम का सेवन, खानपान पर विशेष ध्यान, पत्तेदार सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें। भरपूर नींद लें। गर्भावस्था के दौरान और डिलीवरी के बाद खुद पर दिया हुआ ध्यान ढलती उम्र में दिखता है। अगर इस अवधि में खानपान या आराम में लापरवाही बरती तो जोड़ों में दर्द समेत कई बीमारियां घेर लेतीं हैं। कहा कि माहवारी के दौरान महिलाओं और किशोरियों को स्वच्छता रखनी चाहिए। कपड़े या सैनेटरी नैपकिन हर चार से छह घंटे के अंतराल में बदलने चाहिए। इनके ज्यादा देर तक इस्तेमाल से संक्रमण हो सकता है।
ई-पेमेंट के लिए किया जागरूक
अमर उजाला की ओर से पत्र वितरकों को ई-पेमेंट से भुगतान लेने की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि कई ऐसे ऐप हैं जिनके जरिये आसानी से भुगतान किया जा सकता है। इससे समय और ईंधन दोनों की ही बचत होगी। साथ ही परिवार के साथ समय गुजारने का वक्त मिलेगा। अमर उजाला अपने सभी पाठकों से निवेदन करता है कि वे ई-पेमेंट के जरिये अखबार के बिल का भुगतान करें।