आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र जो विदेशी विश्वविद्यालयों में हैं या बड़ी कंपनियों में हैं वो अपने पुराने संस्थान में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर काम करेंगे। शनिवार को इंस्टीट्यूट में आयोजित 1993 बैच के एल्युमनाई मीट में इसका एलान पूर्व छात्रों ने खुद किया। इसपर निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने भी सहर्ष स्वीकार किया। छात्र अपने कामकाज के बीच थोड़ा-थोड़ा समय निकालकर संस्थान में आकर छात्रों को पढ़ाने का काम करेंगे।
इसके अलावा विदेशी विश्वविद्यालयों में कार्यरत पूर्व छात्रों ने संस्थान में विदेशी प्रोफेसरों की भर्ती कराने का भी आश्वासन दिया है। इससे संस्थान की वर्ल्ड रैकिंग को फायदा मिलेगा। इसके अलावा विदेशी शिक्षण संस्थानों से अकादमिक समझौता करने पर भी सहमति बनी है।
सस्टेनबल डेवलपमेंट पर काम करेंगे
पूर्व छात्रों ने संस्थान के सस्टेनबल डेवलपमेंट के लिए काम करने की सहमति जताई है। अब इसके अलग-अलग विषयों को तैयार करके सभी पूर्व छात्रों को भेजा जाएगा। इसके अलावा सभी पूर्व छात्र संस्थान को आर्थिक मदद भी देंगे। 1993 बैच के एल्युमनाई एसोसिएशन के समन्वयक प्रो. जयंत कुमार सिंह ने बताया कि बैच के करीब 10 ऐसे छात्र हैं जिन्होंने बड़ी आर्थिक मदद देने की पेशकश की है।