कानपुर। पेशे से शिक्षिका दीपिका श्रीवास्तव स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के बाद घर पर महिलाओं को स्वरोजगार का पाठ पढ़ा रही हैं। उनकी मेहनत की बदौलत 50 महिलाएं न सिर्फ स्वावलंबी हो चुकी हैं बल्कि कुछ ने अपना स्वयं का रोजगार भी स्थापित कर लिया है।
शास्त्रीनगर की रहने वाली दीपिका उन महिलाओं के लिए मिसाल हैं जो खुद आगे बढ़कर समाज की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखती हैं। दीपिका वर्तमान में रावतपुर स्थित एक निजी स्कूल में प्रिंसिपल हैं। वह जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में शिक्षा भी देती हैं। वह बताती हैं कि शादी से पहले से ही उन्हें पढ़ाने का शौक था। कोविड-19 के दौरान जब कई बच्चों की पढ़ाई रुक गई तब उन्होंने ऑनलाइन जूम क्लास के जरिये मुफ्त शिक्षा देना शुरू किया। इसी बीच विवाह के बाद उनका स्कूल छूट गया।
पारिवारिक परिस्थितियों और पति की अस्वस्थता के कारण दीपिका को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। हालात सुधरने के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में दोबारा कदम रखा और उन बच्चों को पढ़ाना शुरू किया जिनके माता-पिता फीस देने में सक्षम नहीं थे। स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ दीपिका ने इन बच्चों की माताओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया। उन्होंने एनजीओ की मदद से महिलाओं को घर बैठे रोजगार से जोड़ना शुरू किया। किसी को पापड़ बनाने का काम मिला तो किसी को बैग, सिलाई-कढ़ाई और घरेलू उत्पाद तैयार करने का अवसर। वर्तमान में उनके स्कूल में करीब 70 से ज्यादा बच्चे मुफ्त में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
दीपिका ने अपनी सहयोगी महिलाओं के साथ मिलकर ‘कल्याणी प्रोजेक्ट’ की भी शुरुआत की है। इसके अंतर्गत वे महिलाओं को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण देकर उनके लिए रोजगार के नए अवसर तैयार कर रही हैं। उनका मानना है कि शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही महिला सशक्तिकरण की असली कुंजी है। अगर एक महिला खड़ी हो जाती है तो पूरा परिवार और समाज मजबूत हो जाता है।