सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव।
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शायद तभी उसमें इतनी बेचैनी है। आज भाजपा को हर गांव-शहर व दल के अंदर भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा का विपक्ष पर लगातार आरोप लगाना, उनकी हताशा का प्रतीक है।
अखिलेश यादव भाजपा और पीएम मोदी पर तंज कसने का एक मौका भी नहीं छोड़ते हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि ‘विकास’ पूछ रहा है, 'मार्गदर्शक मंडल को ही बाहर का रास्ता दिखा देने वाले किस संस्कृति, चाल, चलन, चरित्र का परिचय दे रहे हैं?' भाजपा के दिखावे की नैतिकता का भंडाफोड़ हो गया है। युवा तो पहले ही भाजपा को वोट नहीं दे रहे थे, अब बड़े-बुजुर्ग भी नहीं देंगे। भाजपा अंदर से टूट गई है।