मुख्यमंत्री जी को उप्र की ये दुर्दशा नहीं दिख रही है कि खेतों में आवारा जानवरों व मंडियों में बिचौलियों से किसान परेशान हैं। व्यापारियों का बुरा हाल है, महिलाएं उत्पीड़ित हैं व युवाओं पर बेरोजगारी की मार है। वो तो अलोकतांत्रिक अभद्र भाषा-भाषण में व्यस्त हैं। दुर्भाग्यपूर्ण।